उत्तराखंड के पहाड़ी जिले उत्तरकाशी में हाल ही में आई प्राकृतिक आपदा ने नैनीताल के पर्यटन उद्योग को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। स्वतंत्रता दिवस के लिए होने वाली तीन दिन की छुट्टियों के लिए पहले से की गई करीब 50% बुकिंग रद्द हो चुकी हैं। इसका परिणाम यह है कि नैनीताल की मालरोड, बाजार, होटल और रेस्टोरेंट्स में सन्नाटा पसरा हुआ है। सोशल मीडिया और इंटरनेट पर वायरल हो रहे आपदा से संबंधित वीडियो और संदेशों ने पर्यटकों में डर पैदा कर दिया है, जिसके कारण वे नैनीताल आने से कतरा रहे हैं। स्थानीय व्यापारी मौसम में सुधार और स्थिति सामान्य होने की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
पर्यटन कारोबार में भारी गिरावट
जुलाई के मध्य से ही नैनीताल का पर्यटन कारोबार धीमा पड़ने लगा था। कारोबारियों को उम्मीद थी कि स्वतंत्रता दिवस के लंबे वीकेंड के दौरान पर्यटकों की भीड़ बढ़ेगी और कारोबार को गति मिलेगी। होटलों और रेस्टोरेंट्स ने विशेष तैयारियां की थीं, और अगस्त की शुरुआत में एडवांस बुकिंग भी शुरू हो गई थी। हालांकि, उत्तरकाशी के धराली में आई भीषण आपदा ने इन उम्मीदों पर पानी फेर दिया। आपदा की खबरों और नेशनल मीडिया की कवरेज के साथ-साथ सोशल मीडिया पर वायरल सामग्री ने पर्यटकों का नैनीताल की ओर रुझान कम कर दिया।
बाजारों में सन्नाटा, होटल खाली
आपदा के बाद पर्यटकों की संख्या में भारी कमी आई है। रविवार के वीकेंड पर भी मालरोड और अन्य बाजारों में सन्नाटा छाया रहा। नैनी झील में नौकायन के लिए आने वाले पर्यटकों की कमी के कारण नाविक भी निराश हैं। होटल और रेस्टोरेंट्स लगभग खाली पड़े हैं। कारोबारियों ने पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए होटल के किराए में भी कमी की है, लेकिन इसके बावजूद पर्यटक नैनीताल का रुख करने से हिचक रहे हैं।
भविष्य की चिंता
यदि आने वाले दिनों में मौसम और परिस्थितियों में सुधार नहीं हुआ, तो नैनीताल के पर्यटन उद्योग को और बड़ा नुकसान होने की आशंका है। व्यापारी और होटल संचालक मौसम के सामान्य होने और पर्यटकों के विश्वास को पुनः जीतने की उम्मीद कर रहे हैं। स्थानीय प्रशासन और व्यापारियों को मिलकर ऐसी रणनीतियां बनाने की जरूरत है, जो पर्यटकों को यह भरोसा दिला सकें कि नैनीताल यात्रा के लिए सुरक्षित और आकर्षक है।