काशीपुर स्थित श्रीगुरूनानक सीनियर सेकेंड्री स्कूल में छात्र द्वारा अपने ही गुरु पर तमंचे से गोली चलाने की घटना ने पूरे समाज को झकझोर दिया है। इस घटना ने गुरु-शिष्य के भरोसे की नींव हिला दी है। उत्तराखंड ही नहीं, देशभर में इस खबर की गूंज सुनाई दे रही है। शिक्षकों में गुस्सा और अभिभावकों में डर साफ झलक रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ऐसी घटनाओं से सबक नहीं लिया गया तो आने वाला भविष्य बेहद खतरनाक साबित हो सकता है।
राज्यपाल पुरस्कार प्राप्त शिक्षिका नमिता पंत ने घटना पर गहरा दुख जताते हुए कहा कि गुरु और शिष्य का रिश्ता मातृत्व-पितृत्व जैसा होना चाहिए। उन्होंने कहा कि घर पर बच्चों में अच्छे संस्कार डालने और स्कूलों में प्रारंभिक कक्षा से काउंसलिंग की व्यवस्था जरूरी है। नमिता पंत ने सुझाव दिया कि बच्चों को योग, ध्यान और मनोवैज्ञानिक शिक्षा दी जानी चाहिए, ताकि उनके भीतर विवेक और सकारात्मक सोच का विकास हो सके।
वहीं, वरिष्ठ शिक्षक प्रशांत सिंह ने कहा कि यह केवल एक शिक्षक पर हमला नहीं बल्कि पूरे समाज, शिक्षा व्यवस्था और सांस्कृतिक मूल्यों के लिए खतरे की घंटी है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या डिजिटल प्लेटफॉर्म, हिंसक कंटेंट और असामाजिक गतिविधियां बच्चों को गलत दिशा की ओर धकेल रही हैं? प्रशांत सिंह ने विद्यालयों में नियमित संवाद, काउंसलिंग, नैतिक शिक्षा और जीवन कौशल को अनिवार्य करने की जरूरत पर बल दिया।
अभिभावकों और शिक्षकों का कहना है कि बच्चों के व्यवहार, संगति और मानसिक स्थिति पर लगातार नजर रखना बेहद जरूरी है। हर नागरिक की जिम्मेदारी है कि वह बच्चों को सही दिशा दिखाने में योगदान दे, ताकि ऐसे घटनाक्रम दोबारा न हों।