उत्तराखंड सरकार अपने ऑनलाइन गेमिंग एक्ट को लागू करने से पहले केंद्र सरकार के कानून का गहन अध्ययन कर रही है। ऑनलाइन गेमिंग के बढ़ते बाजार ने युवाओं को आकर्षित किया है, लेकिन रियल मनी गेमिंग के कारण कई लोग अपनी जमा-पूंजी गंवा रहे हैं। केंद्र सरकार ने मनी गेमिंग पर रोक लगाई है, और अब राज्य सरकार केंद्र के दिशानिर्देशों के आधार पर अपने एक्ट को नए सिरे से तैयार करने की योजना बना रही है।
प्रमुख बिंदु
- केंद्र के कानून का अध्ययन: उत्तराखंड सरकार ऑनलाइन गेमिंग एक्ट को लागू करने से पहले केंद्र के कानून की बारीकियों का विश्लेषण कर रही है, जिसमें यह देखा जा रहा है कि किन खेलों को अनुमति दी गई है और किन पर प्रतिबंध लगाया गया है।
- मनी गेमिंग पर केंद्र की रोक: केंद्र सरकार ने रियल मनी गेमिंग पर प्रतिबंध लगाया है और उल्लंघन के लिए कठोर सजा का प्रावधान किया है।
- युवाओं पर प्रभाव: ऑनलाइन गेमिंग ऐप्स और साइट्स, जैसे क्रिकेट, फुटबॉल, लूडो, शतरंज, ताश, और सट्टेबाजी, में रियल मनी दांव के कारण युवा अपनी बचत गंवा रहे हैं।
- राज्य का प्रस्तावित एक्ट: उत्तराखंड ने पहले एक गेमिंग एक्ट का मसौदा तैयार किया था, जिसमें गेम ऑफ स्किल को छूट दी गई थी, लेकिन जुए पर प्रतिबंध प्रस्तावित था। अब इसे केंद्र के कानून के अनुरूप संशोधित किया जाएगा।
- आर्थिक लाभ की संभावना: ऑनलाइन गेमिंग को मनोरंजन की श्रेणी में रखकर 28% जीएसटी लागू करने से राज्य को राजस्व लाभ हो सकता है।
ऑनलाइन गेमिंग का बढ़ता बाजार और चुनौतियाँ
भारत में ऑनलाइन गेमिंग का बाजार तेजी से विस्तार कर रहा है। विभिन्न ऐप्स और वेबसाइट्स क्रिकेट, फुटबॉल, लूडो, शतरंज, ताश, और सट्टेबाजी जैसे खेलों को बढ़ावा दे रही हैं। इन खेलों में खिलाड़ी अनुमान के आधार पर रियल मनी दांव लगाते हैं, जिससे तेजी से पैसा कमाने का लालच बढ़ता है। हालांकि, इसकी वजह से कई युवा अपनी वर्षों की कमाई गंवा चुके हैं। यह सामाजिक और आर्थिक चुनौती बन गया है, जिसके समाधान के लिए सरकार को ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है।
केंद्र और राज्य के कानूनों का तालमेल
केंद्र सरकार ने हाल ही में ऑनलाइन गेमिंग को विनियमित करने के लिए एक कानून लागू किया है, जिसमें मनी गेमिंग पर रोक और कठोर दंड का प्रावधान शामिल है। उत्तराखंड सरकार ने पहले अपना ऑनलाइन गेमिंग एक्ट तैयार किया था, जिसमें गेमिंग कंपनियों को लाइसेंस देने और गेम ऑफ स्किल को अनुमति देने की योजना थी। हालांकि, सार्वजनिक जुए पर प्रतिबंध प्रस्तावित था। अब केंद्र के नए कानून को देखते हुए राज्य अपने एक्ट को संशोधित करने की प्रक्रिया में है।
राज्य सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि उसका एक्ट केंद्र के दिशानिर्देशों के अनुरूप हो। इसके लिए यह विश्लेषण किया जा रहा है कि केंद्र ने किन खेलों को प्रतिबंधित किया है और किन्हें अनुमति दी है। सचिव गृह शैलेश बगौली ने बताया कि केंद्र के कानून का अध्ययन पूरा होने के बाद राज्य का एक्ट नए सिरे से तैयार किया जाएगा।
प्रस्तावित उपाय और भविष्य की दिशा
उत्तराखंड सरकार का लक्ष्य एक ऐसा गेमिंग एक्ट तैयार करना है, जो न केवल ऑनलाइन गेमिंग को विनियमित करे, बल्कि युवाओं को आर्थिक नुकसान से भी बचाए। इसके लिए निम्नलिखित उपायों पर विचार किया जा सकता है:
- लाइसेंसिंग और नियमन: ऑनलाइन गेमिंग कंपनियों के लिए सख्त लाइसेंसिंग प्रक्रिया लागू की जाए, ताकि केवल वैध और पारदर्शी प्लेटफॉर्म ही संचालित हो सकें।
- गेम ऑफ स्किल को प्रोत्साहन: कौशल आधारित खेलों को प्रोत्साहित किया जाए, जबकि जुआ और सट्टेबाजी पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए।
- जागरूकता अभियान: युवाओं को ऑनलाइन गेमिंग के जोखिमों के बारे में जागरूक करने के लिए अभियान चलाए जाएँ।
- आर्थिक लाभ का उपयोग: गेमिंग से प्राप्त जीएसटी राजस्व का उपयोग सामाजिक और आर्थिक विकास के लिए किया जाए।
निष्कर्ष
ऑनलाइन गेमिंग का बढ़ता बाजार उत्तराखंड के लिए अवसर और चुनौती दोनों है। केंद्र सरकार के मनी गेमिंग पर प्रतिबंध के बाद, राज्य सरकार अपने ऑनलाइन गेमिंग एक्ट को संशोधित करने की दिशा में कदम उठा रही है। केंद्र के कानून का गहन अध्ययन कर उत्तराखंड एक ऐसा एक्ट तैयार करने की योजना बना रहा है, जो युवाओं को आर्थिक नुकसान से बचाए और राज्य को राजस्व लाभ प्रदान करे। इस दिशा में त्वरित और प्रभावी कदम उठाने की आवश्यकता है।