देहरादून में एक वरिष्ठ नागरिक से 44.50 लाख रुपये की साइबर ठगी करने वाले आरोपी अजय कुमार त्रिपाठी को उत्तराखंड पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने गाजियाबाद से गिरफ्तार किया है। आरोपी फर्जी ट्रस्ट और कंपनियों की आड़ में लोगों को लालच देकर बैंक खाते खुलवाता था, जिनका इस्तेमाल कंबोडिया और थाइलैंड के साइबर अपराधी ठगी के लिए करते थे।
ठगी का तरीका
एसएसपी एसटीएफ नवनीत भुल्लर के अनुसार, पीड़ित वरिष्ठ नागरिक को फेसबुक लिंक के जरिए अभिनंदन स्टॉक ब्रोकिंग प्राइवेट लिमिटेड और एएसबी इन्वेस्ट एंड ग्रो के वाट्सएप ग्रुप में जोड़ा गया। शेयर ट्रेडिंग, आईपीओ और एफपीओ में मोटा मुनाफा कमाने का लालच देकर उनसे एक फर्जी ऐप डाउनलोड करवाया गया। इसके बाद 10 जून से 5 अगस्त के बीच पीड़ित से विभिन्न खातों में 44.50 लाख रुपये ट्रांसफर करवाए गए।
गिरफ्तारी और बरामदगी
पुलिस ने साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में दर्ज मुकदमे के आधार पर जांच शुरू की। मोबाइल नंबर, बैंक खातों, वाट्सएप और मैसेंजर चैट्स की जांच के बाद आरोपी अजय कुमार त्रिपाठी, मूल रूप से लखनऊ का निवासी और वर्तमान में गाजियाबाद के इंदिरापुरम में रहने वाला, को गिरफ्तार किया गया।
आरोपी के पास से बरामद सामान:
- 5 चेक बुक
- 3 स्टांप
- 3 पैन कार्ड
- 2 आधार कार्ड
- 1 डेबिट कार्ड
- 3 ट्रस्ट और कंपनियों की फ्लैक्सी
- 1 मोबाइल फोन
- 2 सिम कार्ड
- श्री शिव श्याम सेवा ट्रस्ट, सरस्वती फाउंडेशन और एक्सएमपीएस स्टेट इंपेक्स प्राइवेट लिमिटेड की ट्रस्ट डीड
अंतरराष्ट्रीय साइबर गिरोह से संबंध
आरोपी के मोबाइल से टेलीग्राम चैट के जरिए बैंक खातों और लेनदेन की जानकारी मिली। जांच में पता चला कि वह कंबोडिया और थाइलैंड के अंतरराष्ट्रीय साइबर ठग गिरोह से जुड़ा था। आरोपी फर्जी दस्तावेजों और ट्रस्ट के नाम पर खोले गए खातों को इन गिरोहों को बेचता था, जिसके बदले उसे 1% कमीशन मिलता था।
ठगी का जाल
आरोपी श्री शिव श्याम सेवा ट्रस्ट जैसे फर्जी संगठनों के नाम पर बैंक खाते खोलता था, जिनका उपयोग साइबर ठगी और धोखाधड़ी में होता था। पूछताछ में उसने स्वीकार किया कि उसने फर्जी आधार कार्ड, पैन कार्ड और ट्रस्ट बनाकर लोगों को ठगा। पीड़ित को वाट्सएप ग्रुप में जोड़कर शेयर ट्रेडिंग के नाम पर ठगी की गई।
एसटीएफ अब गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश में जुटी है।