सिविल व्यवस्था सुधार से परे, अब सेना संभालेगी ट्रैफिक का मोर्चा

सिविल व्यवस्था सुधार से परे, अब सेना संभालेगी ट्रैफिक का मोर्चा

देहरादून की सड़कों पर बढ़ते ट्रैफिक जाम, लापरवाही और अनुशासनहीनता के बीच अब भारतीय सेना ने मोर्चा संभाल लिया है। शहर के प्रमुख चौराहों और व्यस्त सड़कों पर सेना के अनुशासित जवान यातायात वार्डन के रूप में तैनात किए जाएंगे। ये जवान न केवल ट्रैफिक प्रबंधन करेंगे, बल्कि नियम तोड़ने वाले चालकों को सड़क सुरक्षा के नियम सिखाएंगे और उल्लंघन का विवरण दर्ज कर यातायात पुलिस को चालान के लिए सूचित करेंगे।

यह कदम इसलिए उठाया गया है क्योंकि वर्तमान समय में सड़कों पर अनुशासन की अत्यधिक आवश्यकता है और सिविल पुलिस तथा ट्रैफिक पुलिस की व्यवस्था अब सुधार के दायरे से बाहर लगती है। लगता है कि कोई भी इस व्यवस्था को बेहतर बनाने में गंभीरता से रुचि नहीं रखता। ट्रैफिक पुलिस और होमगार्ड को कोई व्यावसायिक या नियमित प्रशिक्षण नहीं दिया जाता। सीमित और अपर्याप्त प्रशिक्षण के कारण उनकी विशेषज्ञता, दक्षता और कार्यकुशलता लगातार कम होती जा रही है।

इसके अलावा विभाग में कई पुलिसकर्मी शारीरिक रूप से अयोग्य हैं और कार्यालय चलाने के लिए उपयुक्त नहीं हैं, लेकिन उनसे कोई सवाल नहीं किया जाता। ऐसी स्थिति में सड़कों पर अनुशासनहीनता और दुर्घटनाएं दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही हैं। दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे के शुरू होने, पांवटा साहिब राजमार्ग के चौड़ीकरण और अन्य राजमार्गों पर बढ़ते वाहन दबाव के साथ यह समस्या और गंभीर होने वाली है।

इन सभी नीतिगत खामियों और लगातार बिगड़ती स्थिति को देखते हुए अब सेना के जवानों का सहारा लिया जा रहा है, जिनकी अनुशासन, प्रशिक्षण और दक्षता निर्विवाद है। राजपुर रोड, घंटाघर, बल्लूपुर चौक जैसे व्यस्त चौराहों पर उनकी तैनाती से ट्रैफिक व्यवस्था में सुधार की उम्मीद जगी है।

यह निर्णय लोक निर्माण विभाग (लोनिवि) और जिला सड़क सुरक्षा समिति के प्रस्ताव पर जिलाधिकारी सविन बंसल के आदेश और कमान अधिकारी कर्नल पी थपलियाल के सुझाव पर लिया गया है। दिल्ली में सेना की ऐसी तैनाती से नियमों का पालन बढ़ा है और व्यवस्था में सुधार आया है। देहरादून में भी यह पहल सड़क सुरक्षा और अनुशासन को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। सफल होने पर इसका अनुपालन अन्य जगहों पर भी किया जा सकता है I

सिविल व्यवस्था के लगातार बिगड़ते हालात में सेना की अनुशासित उपस्थिति अब सड़कों पर सुरक्षा और व्यवस्था बहाल करने का उत्तराखंड पुलिस के लिए एकमात्र प्रभावी विकल्प बनकर उभर रही है।

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