उत्तराखंड में मिला नया ओम पर्वत, श्रद्धालुओं और वैज्ञानिकों में उत्सुकता

ओम पर्वत

हिमालयी क्षेत्र में मिले दो रहस्यमयी ओम पर्वत, आस्था और विज्ञान दोनों के लिए बना शोध का विषय

हिमालयी क्षेत्र में धार्मिक ग्रंथों में वर्णित आठ ओम पर्वतों में से अब तक दो ओम पर्वतों की पहचान हो चुकी है। इन पर्वतों की विशेषता यह है कि बर्फ जमने पर इन पर ‘ॐ’ का स्पष्ट स्वरूप प्राकृतिक रूप से उभर आता है, जिसे श्रद्धालु चमत्कार और शोधकर्ता भू-आकृतिक संरचना मानते हैं।


🏔️ पहला ओम पर्वत: व्यास घाटी के नावीढांग के पास

अब तक सबसे अधिक चर्चित ओम पर्वत व्यास घाटी में नावीढांग के समीप स्थित है। बर्फबारी के दौरान इस पर्वत पर उभरने वाली ‘ॐ’ की आकृति दूर से ही साफ दिखाई देती है। इसी कारण यह क्षेत्र वर्षों से श्रद्धालुओं, पर्यटकों और शोधकर्ताओं के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।


🌄 दूसरा ओम पर्वत: दारमा घाटी के नागलिंग गांव में मिला

दूसरा ओम पर्वत दारमा घाटी के नागलिंग गांव के निकट स्थित है,

जिसे स्थानीय लोग पीढ़ियों से धार्मिक स्थल के रूप में पूजते आ रहे हैं।

ग्रामीणों के अनुसार, इस पर्वत की जड़ में नाग की आकृति मौजूद है, जिसके कारण गांव का नाम नागलिंग पड़ा।

यहीं से एक छोटी नदी निकलती है, जो आगे जाकर धौलीगंगा नदी में मिलती है।

इसके उत्तर में पंचाचूली पर्वत शृंखला स्थित है, जो इस क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता को और बढ़ाती है।


❄️ बर्फ से उभरती है ‘ॐ’ की अद्भुत आकृति

स्थानीय लोगों का कहना है कि जब पर्वत पर बर्फ कम होती है, तब ‘ॐ’ की आकृति अधिक बड़ी और स्पष्ट दिखाई देती है।
वहीं, अधिक बर्फबारी के दौरान भी यह आकृति बनी रहती है, हालांकि उसका आकार अपेक्षाकृत छोटा प्रतीत होता है। खास बात यह है कि यह बर्फीली आकृति लगभग सालभर बनी रहती है


ओम पर्वत तक पहुंचना अपेक्षाकृत आसान

नागलिंग गांव से लगभग 150 मीटर की चढ़ाई के बाद हिमचुली का वयाशी बुग्याल आता है,

जहां से ओम पर्वत के स्पष्ट दर्शन होते हैं।

शीतकाल में यह पूरा क्षेत्र कई फीट बर्फ से ढका रहता है, जबकि पश्चिमी दिशा से ओम पर्वत का स्वरूप विशेष रूप से नजर आता है।


☀️ दिन में सात बार सूर्योदय और सूर्यास्त का अनोखा दृश्य

ओम पर्वत के समीप स्थित दारमा गांव में दिसंबर से अप्रैल के बीच एक अनोखी प्राकृतिक घटना देखने को मिलती है।

इस अवधि में पर्वत शृंखलाओं के कारण दिन में सात बार सूर्य पर्वतों के पीछे ओझल हो जाता है,

जिससे ग्रामीण इसे सात बार सूर्योदय और सात बार सूर्यास्त मानते हैं।

इसी कारण इस अवधि में ग्रामीण माइग्रेशन कर निचली घाटियों में चले जाते हैं। वर्ष के शेष महीनों में गांव में सूर्योदय से सूर्यास्त तक पूरी धूप रहती है और लोग गांव में ही निवास करते हैं।


शेष ओम पर्वतों की खोज की जरूरत

विशेषज्ञों का मानना है कि धार्मिक मान्यताओं और प्राकृतिक संरचनाओं के इस अनूठे संगम को देखते हुए

अन्य ओम पर्वतों की खोज के लिए विस्तृत सर्वेक्षण और वैज्ञानिक अध्ययन आवश्यक है।

आने वाले समय में यह क्षेत्र धार्मिक पर्यटन और शोध दोनों के लिए महत्वपूर्ण बन सकता है।

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