उत्तराखंड के मध्यकालीन इतिहास में नया अध्याय: डॉ. महेंद्र सिंह पाल की पुस्तक ने खोली प्राचीन कत्युरी-पाल वंश की गाथा

कत्युरी पाल वंश का इतिहास

देवभूमि उत्तराखंड की समृद्ध ऐतिहासिक विरासत को संरक्षित करने की दिशा में एक नई पहल सामने आई है। उत्तराखंड हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता, पूर्व सांसद और सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. महेंद्र सिंह पाल द्वारा लिखित पुस्तक “कत्युरी पाल वंश का इतिहास – दस्तावेजी प्रमाण” ने कुमाऊं के प्राचीन राजवंशों पर नई रोशनी डाली है। यह किताब शिलालेखों, ताम्रपत्रों, प्राचीन अभिलेखों, लोक परंपराओं और पारिवारिक वंशावलियों पर आधारित गहन शोध है, जो कत्युरी राजवंश और उससे निकली पाल शाखा के संबंधों को प्रमाणिक रूप से स्पष्ट करती है।

कत्युरी राजवंश: उत्तराखंड का स्वर्णिम मध्ययुगीन साम्राज्य

कत्युरी (या कत्यूरी) राजवंश उत्तराखंड का सबसे प्रमुख और शक्तिशाली मध्यकालीन राजवंश रहा है।

  • संस्थापक: वासुदेव कत्युरी (कुछ स्रोतों में वसंतदेव या बसंत देव) को संस्थापक माना जाता है। वे एक कुशल योद्धा और प्रशासक थे।
  • प्रारंभिक राजधानी: जोशीमठ (प्राचीन कार्तिकेयपुर)।
  • मुख्य राजधानी: बाद में बैजनाथ (कत्युर घाटी में स्थित कार्तिकेयपुर) स्थानांतरित की गई।

इस काल में कत्युरी शासकों ने बैजनाथ मंदिर (बसंत देव द्वारा निर्मित), जागेश्वर धाम जैसे महत्वपूर्ण मंदिरों का निर्माण करवाया, जो आज भी उत्तराखंड की वास्तुकला और धार्मिक धरोहर के प्रतीक हैं। उनका साम्राज्य कुमाऊं-गढ़वाल से पश्चिमी नेपाल तक फैला था। वे ‘गिरीराज चक्रचूड़ामणि’ की उपाधि धारण करते थे और सूर्यवंशी होने का दावा करते थे, जिनकी जड़ें अयोध्या के शालिवाहन से जुड़ी मानी जाती हैं।

पाल वंश: कत्युरी की प्रमुख शाखा और अस्कोट रियासत

पुस्तक का मुख्य फोकस पाल वंश पर है, जिसे कत्युरी राजवंश की एक महत्वपूर्ण उप-शाखा माना गया है। कत्युरी साम्राज्य के विघटन के बाद कई शाखाएं अलग हुईं। इनमें से एक प्रमुख अस्कोट (पिथौरागढ़ जिला) में स्थापित हुई।

  • संस्थापक: अभयपाल देव (कत्युरी राजा ब्रह्मदेव के पौत्र) ने 1279 ई. में अस्कोट रियासत की नींव रखी।
  • उपाधि: पाल शासकों को ‘राजवार’ कहा जाता था।
  • विस्तार: रियासत लगभग 900 वर्ग किमी में फैली और 1967 तक (स्वतंत्र भारत में विलय तक) अस्तित्व में रही।
  • वर्तमान अवशेष: अस्कोट महल आज भी खड़ा है और पाल वंश की गौरवशाली याद दिलाता है।

डॉ. महेंद्र सिंह पाल स्वयं अस्कोट के पूर्व राजघराने से संबंधित हैं, इसलिए पुस्तक में पारिवारिक दस्तावेज और व्यक्तिगत अनुभव भी शामिल हैं, जो इसे और अधिक प्रमाणिक बनाते हैं।

चंद वंश का उदय

कत्युरी वंश उत्तराखंड और नेपाल में विघटन हो गया और छोटी रियासतें कुमाऊं, गढ़वाल, नेपाल और उत्तर प्रदेश में टूट गईं, आंतरिक कलह, बाहरी आक्रमण और विखंडन प्रमुख कारण थे। इसके बाद कुमाऊं में चंद वंश का उदय हुआ। चंद वंश के संस्थापक सोमचंद का विवाह कत्युरी राजा ब्रह्मदेव की पुत्री से हुआ था, जिससे दोनों वंशों के बीच वैवाहिक संबंध स्थापित हुए।

डॉ. पाल ने अपनी पुस्तक में लिखा है: “कत्युरी-पाल वंश देवभूमि की सांस्कृतिक और राजनैतिक गौरवगाथा का अभिन्न हिस्सा है। इन दस्तावेजों को संरक्षित रखना हम सबकी जिम्मेदारी है, ताकि युवा पीढ़ी अपनी जड़ों से जुड़ सके और उत्तराखंड की प्राचीन पहचान को मजबूत बनाए रख सके।”

डॉ. महेंद्र सिंह पाल की प्रमुख उपलब्धियां

डॉ. महेंद्र सिंह पाल उत्तराखंड की राजनीति, कानून और सामाजिक क्षेत्र में एक प्रमुख व्यक्तित्व हैं। उनकी कुछ प्रमुख उपलब्धियां इस प्रकार हैं:

  • दो बार लोकसभा सांसद: नैनीताल लोकसभा सीट से 9वीं लोकसभा और 2002 में 13वीं लोकसभा निर्वाचित। संसद में वे शहरी एवं ग्रामीण विकास समिति के सदस्य भी रहे।
  • वरिष्ठ अधिवक्ता: 2004 में सीनियर एडवोकेट के रूप में नामित। उत्तराखंड हाईकोर्ट, नैनीताल में प्रमुख वकील के तौर पर प्रैक्टिस करते हैं। उत्तराखंड हाईकोर्ट के पूर्व अतिरिक्त महाधिवक्ता (सुप्रीम कोर्ट में) रहे।
  • बार काउंसिल और एसोसिएशन के पद: उत्तराखंड बार काउंसिल के कई बार अध्यक्ष और हाईकोर्ट बार एसोसिएशन, उत्तराखंड के कई बार अध्यक्ष रहे। हाल ही में 2023 में भी बार काउंसिल के अध्यक्ष चुने गए।
  • अन्य योगदान: हल्द्वानी के सैनिक बोर्ड के कानूनी सलाहकार रहे। उत्तराखंड राज्य आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई। कुमाऊं विश्वविद्यालय और आईआईएम काशीपुर जैसी संस्थाओं की स्थापना में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
  • सामाजिक कार्य: देव शमशेर सिंह वेलफेयर कमिटी से जुड़े रहे। कांग्रेस पार्टी में वरिष्ठ नेता के रूप में AICC और PCC सदस्य। विभिन्न चुनावों में सक्रिय, जैसे 2022 में रामनगर विधानसभा से प्रत्याशी।

पुस्तक कैसे प्राप्त करें?

यह महत्वपूर्ण पुस्तक स्थानीय स्तर पर आसानी से उपलब्ध है:

  • नैनीताल-हल्द्वानी के प्रमुख बुक स्टोर्स और बार एसोसिएशन में।
  • सीधे लेखक से संपर्क करके।
    संपर्क नंबर: 9412086844
    पता: Upper Mall Road, Tallital, Nainital

यह पुस्तक इतिहासकारों, शोधकर्ताओं, छात्रों और कुमाऊं के कत्युरी-पाल वंशजों के लिए एक अनमोल दस्तावेज साबित होगी। देवभूमि न्यूज़ उत्तराखंड की ऐसी हर कोशिश का स्वागत करता है जो हमारे गौरवशाली अतीत को नई पीढ़ी तक पहुंचाए।

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