
उत्तराखंड राज्य परिवहन प्राधिकरण ने नैनीताल हाईकोर्ट के आदेश का अनुपालन करते हुए राज्य में पहली बार स्कूल बसों और वैन के मासिक किराए आधिकारिक रूप से निर्धारित कर दिए हैं। साथ ही बच्चों की सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित करने के लिए सख्त सुरक्षा नियम लागू किए गए हैं और अभिभावकों के लिए शिकायत दर्ज करने की व्यवस्था भी मजबूत की गई है।
परिवहन आयुक्त *बृजेश कुमार संत की अध्यक्षता में हुई बैठक में यह महत्वपूर्ण फैसला लिया गया। बैठक में लोक निर्माण विभाग के कार्यकारी अभियंता *चंद्रशेखर जोशी* सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे। उच्च न्यायालय के 22 सितंबर 2025 के आदेश के बाद संयुक्त परिवहन आयुक्त राजीव कुमार मेहरा की अध्यक्षता में गठित समिति ने वाहन लागत, किस्तें, चालक-परिचालक वेतन, महिला गार्ड, ईंधन, टैक्स, बीमा और रखरखाव जैसे सभी पहलुओं का विस्तृत आकलन किया।
उद्देश्य: मनमाने किराए पर रोक लगाना और छात्रों को सुरक्षित, सुव्यवस्थित एवं किफायती परिवहन उपलब्ध कराना।
निर्धारित नई मासिक किराया दरें (प्रति छात्र)
स्कूल बसों के लिए:
- 10 किमी तक: ₹2200
- 10 से 20 किमी: ₹2700
- 20 से 30 किमी: ₹3200
- 30 किमी से अधिक: ₹3700
स्कूल वैन के लिए:
- 5 किमी तक: ₹2100
- 5 से 10 किमी: ₹2500
- 10 से 20 किमी: ₹3000
- 20 किमी से अधिक: ₹3500
ये दरें पूरे राज्य के सभी स्कूलों में लागू होंगी। इससे अभिभावकों को राहत मिलेगी और स्कूलों को स्पष्ट दिशा-निर्देश प्राप्त होंगे।
स्कूल परिवहन सुरक्षा नियम (अनिवार्य दिशा-निर्देश)
मोटर वाहन अधिनियम, उच्च न्यायालय/सुप्रीम कोर्ट के आदेशों और उत्तराखंड परिवहन विभाग की नीतियों के अनुसार निम्नलिखित नियम सख्ती से लागू हैं:
वाहन संबंधी अनिवार्यताएँ:
- वैध फिटनेस प्रमाण-पत्र, पंजीकरण, बीमा, PUC और परमिट अनिवार्य।
- फायर एक्सटिंग्विशर, प्राथमिक चिकित्सा किट (First Aid Box) और आपातकालीन दरवाजा जरूरी।
- खिड़कियों पर क्षैतिज समानांतर ग्रिल्स लगी होनी चाहिए।
- बस के बाहर स्कूल का नाम, संपर्क नंबर, रिफ्लेक्टिव टेप और “स्कूल बस” बोर्ड अनिवार्य।
- GPS और CCTV कैमरा लगाना अनुशंसित/कई मामलों में अनिवार्य (फुटेज 60 दिन तक रखना जरूरी)।
- सीटें फायर-रेजिस्टेंट सामग्री की हों।
चालक एवं स्टाफ नियम:
- चालक को कम से कम 5 वर्ष का भारी वाहन चलाने का अनुभव और पुलिस वेरिफिकेशन अनिवार्य।
- महिला छात्राओं वाली बस/वैन में महिला अटेंडेंट/गार्ड की नियुक्ति अनिवार्य।
- ड्राइवर और यात्री के बीच लोहे की ग्रिल वाली पार्टिशन (लड़कियों की वैन में)।
- ओवरलोडिंग पूरी तरह प्रतिबंधित — बस/वैन की क्षमता से अधिक बच्चे नहीं ले जा सकते।
संचालन नियम:
- बस सुबह-शाम तय समय पर ही चले, रात में संचालन सीमित।
- स्टॉपेज पर बच्चे बस पूरी तरह रुकने के बाद ही चढ़ें-उतरें, एक पंक्ति में और हैंडरेल पकड़कर।
- प्रत्येक स्कूल में नोडल ट्रांसपोर्ट अधिकारी (शिक्षक) नामित किया जाए।
- विभाग नियमित सेफ्टी ऑडिट और चेकिंग अभियान चलाता है। उल्लंघन पर भारी जुर्माना, वाहन जब्ती या परमिट रद्द हो सकता है।
बच्चों के लिए सुरक्षा टिप्स:
- बस रुकने तक इंतजार करें, जल्दबाजी न करें।
- खिड़की से हाथ, सिर या कोई वस्तु बाहर न निकालें।
- बस चलते समय सीट पर बैठे रहें, शोर न करें।
- आपात स्थिति में चालक या अटेंडेंट को तुरंत सूचित करें।
अभिभावकों के लिए शिकायत दर्ज करने के आसान तरीके
यदि ओवरलोडिंग, खराब वाहन स्थिति, चालक का खराब व्यवहार, महिला गार्ड की अनुपस्थिति, नए किराए से अधिक शुल्क, GPS/CCTV न होना या अन्य सुरक्षा उल्लंघन दिखे तो तुरंत शिकायत करें:
- ऑनलाइन शिकायत (सबसे आसान):
परिवहन विभाग की आधिकारिक वेबसाइट https://transport.uk.gov.in पर “स्कूल वाहन फीडबैक” या शिकायत सेक्शन में फॉर्म भरें। वाहन नंबर, स्कूल नाम, रूट, तारीख और समस्या का विस्तार दें। फोटो/वीडियो अपलोड कर सकते हैं। - आरटीओ देहरादून संपर्क:
- फोन: 0135-2743432
- ईमेल: rtodeh-trans-uk@nic.in
- पता: रीजनल ट्रांसपोर्ट ऑफिस, 105 राजपुर रोड, देहरादून।
- परिवहन आयुक्त कार्यालय:
- फोन: 0135-2608105 / 0135-2608107
- ईमेल: tc-trans-uk@nic.in या transportdeptuk@gmail.com
- सीएम हेल्पलाइन:
https://cmhelpline.uk.gov.in/ पर “परिवहन विभाग” चुनकर शिकायत दर्ज करें। स्थिति ऑनलाइन ट्रैक करें। - आपात स्थिति में: पुलिस कंट्रोल रूम — 112, महिला हेल्पलाइन — 1090।
शिकायत दर्ज करते समय दें: वाहन नंबर, स्कूल का नाम, समस्या का पूरा विवरण और सबूत। विभाग शिकायत पर सख्त कार्रवाई करता है।
अभिभावकों के लिए सलाह:
अपने बच्चे से नियमित रूप से बस की स्थिति पूछें, वाहन की फिटनेस और स्टाफ की पृष्ठभूमि जांचें। समस्या होने पर पहले स्कूल के नोडल अधिकारी से बात करें, फिर विभाग में शिकायत करें।
निष्कर्ष:
नए किराया निर्धारण, सुरक्षा नियमों और शिकायत व्यवस्था का उद्देश्य एक ही है — बच्चों को घर से स्कूल और स्कूल से घर तक सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित करना। स्कूल प्रशासन, चालक, अभिभावक और विभाग सभी को इनका सख्ती से पालन करना चाहिए।
बच्चों की सुरक्षा हम सबकी जिम्मेदारी है।
कोई समस्या हो तो ऊपर दिए तरीकों से तुरंत शिकायत करें — छोटी शिकायत भी बड़े सुधार ला सकती है।
सुरक्षित परिवहन = सुरक्षित भविष्य!
