देहरादून/रामनगर, 3 अप्रैल 2026 – उत्तराखंड कांग्रेस में गुटबाजी और टिकट वितरण को लेकर चल रही आंतरिक कलह अब खुलकर आ गई है। पूर्व विधायक और प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रणजीत सिंह रावत ने पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत पर सीधा हमला बोलते हुए परिवारवाद और लॉबिंग का गंभीर आरोप लगाया है। रणजीत रावत का कहना है कि हरीश रावत अपने बेटे को रामनगर सीट से टिकट दिलवाने के लिए हाईकमान पर लॉबिंग कर रहे हैं, जबकि एक बेटी को हरिद्वार और दूसरी बेटे को धर्मपुर से टिकट देने की तैयारी में हैं। उन्होंने संजय नेगी को “सिर्फ मोहरा” करार देते हुए कहा कि यह पूरा खेल परिवार को आगे बढ़ाने का है, न कि संगठन को मजबूत करने का।
रणजीत रावत ने कहा, “हरीश रावत अपने बेटे के लिए रामनगर से लॉबिंग कर रहे हैं।” कई बयानों को सुने तो अब एक बेटी को हरिद्वार तो दूसरे बेटे को धर्मपुर-देहरादून से टिकट दिलवाने की कोशिश में हैं। उन्होंने कहा “संजय नेगी केवल मोहरा हैं, जिन्हें आगे करके परिवार की सियासी जमीन तैयार की जा रही है।” यह बयान ऐसे समय आया है जब हरीश रावत ने संजय नेगी (रामनगर के ज्येष्ठ ब्लॉक प्रमुख) को कांग्रेस में शामिल करवाने के लिए हाईकमान पर दबाव बनाया था, लेकिन रणजीत रावत के गुट के विरोध के चलते 28 मार्च 2026 को दिल्ली में होने वाली ज्वाइनिंग में संजय नेगी का नाम अंतिम समय में कट गया। हरीश रावत इस नाराजगी में 27 मार्च को 15 दिन का राजनीतिक अवकाश ले चुके हैं।
रामनगर सीट पर रावत vs रावत: पुरानी दुश्मनी नई आग
रामनगर विधानसभा सीट कांग्रेस के लिए हमेशा से संवेदनशील रही है। 2022 के विधानसभा चुनाव में भी हरीश रावत रामनगर से टिकट चाहते थे, लेकिन रणजीत रावत ने सीट खाली नहीं की। नतीजा – हरीश रावत ललकुआं शिफ्ट हो गए और चुनाव हार गए। अब 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारी में फिर वही सियासी चालें चल रही हैं। रणजीत रावत रामनगर से अपनी दावेदारी मजबूत कर चुके हैं, जबकि हरीश रावत अपने परिवार के लिए इस सीट को “सुरक्षित” बनाना चाहते हैं। सूत्रों के मुताबिक, हरीश रावत के बेटे (जिनका नाम राजनीतिक गलियारों में चर्चा में है) को रामनगर से उतारने की प्लानिंग चल रही है। इसी बीच एक बेटी को हरिद्वार क्षेत्र से और दूसरे बेटे को धर्मपुर (स्थानीय स्तर पर चर्चित क्षेत्र) से टिकट दिलवाने की लॉबिंग हो रही है। तो कुल मिलाकर परिवार के ही तीन टिकट हरीश रावत चाहते हैं, जैसा पुराने बयानों और सोशल मीडिया में कांग्रेस नेताओं की टिप्पणी से प्रतीत होता है।
संजय नेगी को “मोहरा” बताते हुए रणजीत रावत ने आरोप लगाया कि हरीश रावत नेगी को कांग्रेस में शामिल करवाकर रामनगर में अपना गुट मजबूत करना चाहते थे, ताकि परिवार की टिकट आसान हो सके। नेगी रामनगर के प्रभावशाली नेता हैं, जिनकी पत्नी भी ब्लॉक प्रमुख हैं। वे हरीश रावत के करीबी माने जाते हैं। लेकिन रणजीत रावत के गुट ने उनकी ज्वाइनिंग का विरोध किया। रणजीत रावत ने स्पष्ट किया, “अगर कोई ज्वाइनिंग का विरोध करता है तो जवाब देना चाहिए, लेकिन मेरी राय लिए बिना यह चर्चा शुरू हुई।”
डॉ. हरक सिंह रावत का तीखा कमेंट: “किसी को घमंड नहीं होना चाहिए”
इस विवाद पर कांग्रेस की चुनाव प्रबंधन समिति के अध्यक्ष डॉ. हरक सिंह रावत ने भी तीखा बयान दिया। उन्होंने हरीश रावत के राजनीतिक अवकाश को लेकर अप्रत्यक्ष रूप से निशाना साधते हुए कहा, “किसी को गलतफहमी या घमंड नहीं होना चाहिए कि वह नहीं होगा तो पार्टी जीतेगी नहीं। अरे, कौन होता है हरक सिंह रावत? हरीश रावत की राजनैतिक छुट्टी पर भी मुझे लगता है कि यह सेहत के लिए अच्छा है।” डॉ. हरक सिंह रावत ने हरीश रावत के करीबी गोविंद सिंह कुंजवाल पर भी निशाना साधा और कहा कि पार्टी किसी एक व्यक्ति पर निर्भर नहीं है।
डॉ. हरक सिंह रावत का यह बयान कांग्रेस के अंदरूनी गुटबाजी को और उजागर करता है। वे पहले भाजपा में थे और बाद में कांग्रेस में शामिल हुए। उनका बयान स्पष्ट संदेश देता है कि हरीश रावत की नाराजगी को पार्टी “मजबूरी” की तरह नहीं देख रही, बल्कि संगठन की एकता को प्राथमिकता दी जा रही है।
संजय नेगी का बयान: “हरीश रावत ने युवा नेता को शामिल न करने पर आपत्ति जताई”
संजय नेगी ने खुद इस विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “मेरी ज्वाइनिंग को कुछ नेताओं ने रोका। हरीश रावत का मानना है कि यदि एक युवा और संघर्षशील नेता को पार्टी में नहीं लिया जाता तो संगठन को गलत संदेश जाता है।” नेगी ने हरीश रावत से मुलाकात भी की और अवकाश समाप्त करने की अपील की। लेकिन रणजीत रावत का आरोप है कि नेगी को “मोहरा” बनाकर रामनगर में परिवार की सियासी सेटिंग की जा रही है और पार्टी के खिलाफ कार्य करने वालों को पार्टी में वापसी करने का कोई कारण अब नहीं है।
कांग्रेस हाईकमान पर दबाव: क्या हरीश रावत के हठ के आगे झुक जाएगा आलाकमान?
कांग्रेस हाईकमान (मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी और कुमारी शैलजा) इस पूरे प्रकरण से वाकिफ है। हरीश रावत 60 साल की राजनीतिक यात्रा के बाद भी अपनी बात मनवाने में माहिर हैं। अब सवाल यह है कि क्या हरीश रावत के परिवार के लिए टिकटों की लॉबिंग पर हाईकमान झुकेगा या रणजीत रावत और वरिष्ठ नेता डा० महेंद्र सिंह पाल जैसे दिग्गज और स्थानीय नेताओं की बात मानेगा?
हालांकि हरीश रावत ने हरक सिंह रावत की पार्टी में वापसी के दौरान भी विरोध किया था यही कहकर विरोध किया था कि उन्होंने पार्टी के खिलाफत की है आज वही पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत पार्टी को ही हराने वाले संजय नेगी को पार्टी में लेने को आतुर हैं जिसमें रंजीत रावत का यह बयान सामने आया है की हरीश रावत संजय नेगी को नहीं बल्कि अपने पुत्र के लिए रामनगर से टिकट चाहते हैं।
राजनीतिक विश्लेषक विनोद पपनै का कहना है, “यह सिर्फ रामनगर की लड़ाई नहीं, पूरे कुमाऊं मंडल की गुटबाजी है। अगर कांग्रेस 2027 में बीजेपी से मुकाबला करना चाहती है तो ऐसे आरोप-प्रत्यारोप बंद होने चाहिए।”
हालांकि लोग इसे प्रेशर पॉलिटिक्स मान रहे हैं, लोगों का कहना है कि हरीश रावत के नेतृत्व में कांग्रेस 2017 और 2022 का चुनाव बुरी तरह से हारी है और अगर पार्टी ने जीतना है तो आगे बढ़ना होगा, कार्य करने वाले युवाओं पर भरोसा जताना होगा अन्यथा इस बार दशा और खराब होगी और यूकेडी, स्वाभिमान मोर्चा जैसे दल पार्टी से आगे निकल जाएंगे।
पार्टी में बढ़ती बेचैनी: 2027 के चुनाव पर असर?
उत्तराखंड कांग्रेस पहले से ही धड़ों में बंटी हुई है। हरीश रावत, रणजीत रावत, हरक सिंह रावत और अन्य नेताओं के बीच पुरानी रंजिश अब टिकट वितरण के मुद्दे पर फूट पड़ी है। रणजीत रावत का बयान कई सवाल खड़े करता है – क्या कांग्रेस परिवारवाद से मुक्त हो पाएगी? क्या रामनगर सीट परिवार की जागीर बन जाएगी? और क्या संजय नेगी जैसे स्थानीय नेता सिर्फ “मोहरा” बनकर रह जाएंगे?
हरीश रावत के समर्थक कहते हैं कि वे संगठन को मजबूत करने के लिए प्रयासरत हैं, जबकि विरोधी गुट इसे “परिवार की सियासत” बता रहा है। डॉ. हरक सिंह रावत का बयान पार्टी में एकता की अपील के रूप में देखा जा रहा है, लेकिन यह कलह और गहरा रही है।
क्या कांग्रेस खुद को बचा पाएगी?*
रणजीत रावत का यह विस्फोटक बयान उत्तराखंड कांग्रेस की मौजूदा स्थिति का आईना है। जहां एक तरफ हरीश रावत परिवार और करीबियों के लिए लॉबिंग कर रहे हैं, वहीं रणजीत रावत जैसे नेता स्थानीय दावेदारी और संगठन की बात कर रहे हैं। संजय नेगी का मामला सिर्फ एक कड़ी है – असली लड़ाई 2027 के टिकट वितरण की है। डॉ. हरक सिंह रावत का कमेंट याद दिलाता है कि पार्टी किसी एक या परिवार पर निर्भर नहीं। अब देखना होगा कि हाईकमान इस आग को कैसे बुझाता है।
