हरिद्वार, 6 अप्रैल 2026: उत्तराखंड के हरिद्वार जिले में सीनियर ड्रग इंस्पेक्टर अनीता भारती, इन दिनों भ्रष्टाचार और अवैध वसूली के गंभीर आरोपों में घिर गई हैं। इस प्रकरण ने न केवल प्रशासनिक स्तर पर हलचल मचा दी है, बल्कि हरिद्वार और पूरे उत्तराखंड में नकली दवाओं के रैकेट को लेकर भी गंभीर चिंता पैदा कर दी है।
अनीता भारती पर क्या हैं आरोप और क्या हैं सबूत?
प्राइड फार्मा कंपनी के प्रतिनिधि रमेश मैठानी और युवा कांग्रेस के जिलाध्यक्ष कैश खुराना ने अनीता भारती पर दवा निर्माण लाइसेंस जारी करने के बदले रिश्वत मांगने का आरोप लगाया है। आरोप है कि ऑनलाइन आवेदन के बाद व्हाट्सएप चैट के जरिए पैसे की मांग की गई। एक चैट में ₹15,000 की डिमांड बताई गई, जिसमें ₹10,000 एक अन्य व्यक्ति के बैंक खाते में ट्रांसफर करवाए गए। आरोपकर्ताओं का दावा है कि अलग-अलग चरणों में लाखों रुपये की अवैध वसूली हुई।
सबूत के रूप में व्हाट्सएप चैट के स्क्रीनशॉट्स सोशल मीडिया पर वायरल हो चुके हैं, जिनमें पैसे की डिमांड और ट्रांसफर का जिक्र साफ दिख रहा है। कैश खुराना ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अनीता भारती के सस्पेंशन और आय से अधिक संपत्ति की जांच की मांग की है।
अनीता भारती का पक्ष
अनीता भारती ने इन आरोपों को पूरी तरह निराधार और भ्रामक बताया है। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर एक वीडियो और पोस्ट वायरल कर उनके खिलाफ झूठा प्रचार किया जा रहा है। उन्होंने कैश खुराना के खिलाफ रानीपुर कोतवाली में मुकदमा भी दर्ज कराया है। इससे पहले भी उनके सख्त रवैये के कारण विवाद हुआ था और उन्हें मुख्यालय अटैच या ट्रांसफर किया गया था।
हरिद्वार में नकली दवाओं का रैकेट और अनीता भारती की भूमिका
उत्तराखंड में नकली दवा रैकेट का बड़ा नेटवर्क सक्रिय है – STF ने हाल ही में फार्मा कंपनियों के मालिकों और प्लांट हेड्स को गिरफ्तार किया था। हरिद्वार औद्योगिक क्षेत्र होने के कारण यहां दवा निर्माण इकाइयां ज्यादा हैं, लेकिन लाइसेंस प्रक्रिया में अनियमितता से नकली दवाएं बाजार में पहुंच सकती हैं।
जन स्वास्थ्य के लिहाज से क्यों जरूरी है गहन जांच?
यह मामला सिर्फ एक अधिकारी पर आरोप नहीं, बल्कि पूरे जिले और राज्य के जन स्वास्थ्य से जुड़ा है।
- नकली या सब-स्टैंडर्ड दवाएं गंभीर बीमारियों, साइड इफेक्ट्स, यहां तक कि मौत का कारण बन सकती हैं।
- हरिद्वार तीर्थ स्थल है – लाखों श्रद्धालु यहां आते हैं, जिनकी दवा की खपत ज्यादा होती है।
- अगर लाइसेंस देने में भ्रष्टाचार हुआ तो असली दवाओं की जगह नकली दवाएं आसानी से बाजार में पहुंच सकती हैं।
- उत्तराखंड में पहले भी फेक मेडिसिन रैकेट पकड़े गए हैं, जिनमें फार्मा कंपनियां, फर्जी रजिस्ट्रेशन और गलत वेरिफिकेशन शामिल थे।
इस प्रकरण ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं – क्या सख्ती से परेशान कुछ तत्व उन्हें बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं? या सच में लाइसेंस प्रक्रिया में अनियमितता है? दोनों ही स्थिति में गहन जांच जरूरी है। राज्य सरकार, ड्रग कंट्रोलर और पुलिस को CBI या SIT स्तर की जांच करानी चाहिए ताकि सच्चाई सामने आए और जनता को सुरक्षित दवाएं मिल सकें।
जनता की मांग
सोशल मीडिया पर इस मामले पर तीखी बहस छिड़ी हुई है। लोग अनीता भारती पर आरोपों की जांच की मांग कर रहे हैं। युवा कांग्रेस और प्राइड फार्मा ने सस्पेंशन की मांग दोहराई है। अगर आरोप सही हैं तो जन स्वास्थ्य को खतरे में डालने वाले किसी भी तत्व को बख्शा नहीं जाना चाहिए। नकली दवा रैकेट पर पूरी तरह लगाम कसने के लिए पारदर्शी जांच ही एकमात्र रास्ता है।
