नई दिल्ली, 8 अप्रैल 2026: मध्य पूर्व में अमेरिका-ईरान तनाव के बीच हार्मुज जलडमरूमध्य के पुनः खुलने और युद्ध में डी-एस्केलेशन (कमी) की खबरों से वैश्विक बाजारों में राहत की लहर दौड़ गई है। इससे सोने-चांदी के भावों में स्थिरता आई है और तेल की कीमतें भी कुछ कम होने की उम्मीद जताई जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि हार्मुज का खुलना वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को सामान्य करने, मुद्रास्फीति के दबाव को कम करने और समग्र बाजारों को स्थिरता प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना-चांदी के भावआज सुबह के कारोबार में अंतरराष्ट्रीय बाजार (स्पॉट प्राइस) में सोना लगभग 4,800 डॉलर प्रति औंस के आसपास कारोबार कर रहा है (पिछले दिनों 4,660-4,830 डॉलर के बीच उतार-चढ़ाव देखा गया)। चांदी 76-77 डॉलर प्रति औंस के स्तर पर पहुंच गई है, जो हाल के दिनों में मजबूत रिकवरी दर्शाती है।हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान को हार्मुज खोलने के लिए दिए गए अल्टीमेटम और युद्धविराम की बातचीत के बीच कीमतें संवेदनशील बनी हुई हैं।
हार्मुज के बंद रहने से वैश्विक तेल आपूर्ति में 20% की कमी आई थी, जिससे तेल की कीमतें 110 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई थीं। अब डी-एस्केलेशन और हार्मुज के खुलने की संभावना से तेल बाजार में राहत मिलने और सोने-चांदी जैसे सुरक्षित निवेशों (safe-haven) में दबाव कम होने की उम्मीद है।
भारतीय बाजार में भाव (MCX/स्थानीय स्तर)भारतीय बाजार में आज सुबह:
- 24 कैरेट सोना (10 ग्राम): लगभग ₹1,50,000 से ₹1,53,000 के बीच (शहर के अनुसार थोड़ा भिन्नता)।
- 22 कैरेट सोना (10 ग्राम): ₹1,38,000 से ₹1,40,000 के आसपास।
- चांदी (1 किलो): ₹2,33,000 से ₹2,50,000 तक (MCX पर उतार-चढ़ाव के साथ)।
MCX पर सोने के जून अनुबंध में 2% से अधिक की बढ़ोतरी देखी गई, जबकि चांदी भी मजबूत रही। दिल्ली, मुंबई, चेन्नई और कोलकाता जैसे प्रमुख शहरों में स्थानीय सर्राफा बाजार भी इसी ट्रेंड का अनुसरण कर रहे हैं।हार्मुज खुलने और युद्ध में कमी का प्रभावहार्मुज जलडमरूमध्य दुनिया की लगभग 20% तेल और गैस आपूर्ति का मुख्य मार्ग है। इसके बंद रहने से वैश्विक ऊर्जा संकट गहराया था, जिससे मुद्रास्फीति बढ़ने और ब्याज दरों पर दबाव का खतरा पैदा हुआ था। अब:
- अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थों (पाकिस्तान, मिस्र, तुर्की) की मदद से 45 दिनों के युद्धविराम और हार्मुज खोलने की बातचीत चल रही है।
- यदि हार्मुज पूरी तरह खुल जाता है, तो तेल की कीमतें 80-90 डॉलर प्रति बैरल तक गिर सकती हैं, जिससे वैश्विक मुद्रास्फीति कम होगी।
- इससे सोने-चांदी जैसे सुरक्षित निवेशों में बिकवाली का दबाव बढ़ सकता है, लेकिन लंबे समय में आर्थिक स्थिरता से निवेशकों का विश्वास बढ़ेगा।
विश्लेषकों का कहना है कि बाजार अब “डी-एस्केलेशन” को मूल्यांकित कर रहे हैं। यदि युद्धविराम स्थायी होता है, तो स्टॉक मार्केट, मुद्राएं और कमोडिटी बाजार सामान्य स्थिति की ओर लौटेंगे। यूरोपीय और एशियाई बाजार भी ईस्टर ब्रेक के बाद राहत के साथ खुले हैं।निवेशकों के लिए सलाह
- सोना-चांदी: अल्पावधि में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है, लेकिन भू-राजनीतिक जोखिम कम होने पर स्थिरता आएगी। लंबी अवधि के निवेशकों के लिए यह अच्छा अवसर हो सकता है।
- तेल और ऊर्जा: हार्मुज खुलने से राहत, लेकिन आपूर्ति पूरी तरह बहाल होने में समय लग सकता है।
- विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि पोर्टफोलियो में विविधता बनाए रखें और वैश्विक घटनाक्रम पर नजर रखें।
उत्तराखंड सरकार भी पर्यटन और अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए स्थिर वैश्विक बाजारों की उम्मीद कर रही है, क्योंकि बढ़ी हुई तेल कीमतें परिवहन और पर्यटन क्षेत्र को प्रभावित करती हैं।