14/04/2026- Nainital/
ISRO-परिचय— भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) भारत की वैज्ञानिक उपलब्धियों का प्रतीक है। यह न केवल अंतरिक्ष विज्ञान में आत्मनिर्भरता का प्रतीक है, बल्कि लाखों युवाओं के सपनों को उड़ान देने वाला संस्थान भी है। 1962 में स्थापित INCOSPAR से लेकर आज 2026 तक ISRO ने विश्व पटल पर भारत को चौथी बड़ी अंतरिक्ष शक्ति बना दिया है। डॉ. विक्रम साराभाई के सपने से शुरू हुई यह यात्रा आज चंद्रमा, मंगल, सूर्य और मानव अंतरिक्ष उड़ान तक पहुंच चुकी है।
ISRO की सफलता की कुंजी है – कम लागत, उच्च विश्वसनीयता और स्वदेशी प्रौद्योगिकी। PSLV ने 50 से अधिक विदेशी उपग्रहों को सस्ते में लॉन्च किया, चंद्रयान-3 ने चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर सॉफ्ट लैंडिंग कर इतिहास रचा, और अब गगनयान 2027 में भारतीयों को अंतरिक्ष ले जाने को तैयार है। 2026 में ISRO सात बड़े मिशनों की योजना बना रहा है, जिसमें गगनयान के अनक्रूड टेस्ट शामिल हैं।
यह लेख ISRO के पूरे इतिहास, प्रमुख उपलब्धियों, वर्तमान और आने वाले प्रोजेक्ट्स तथा युवाओं के लिए करियर के विस्तृत अवसरों पर प्रकाश डालता है। यह जानकारी आधिकारिक स्रोतों (isro.gov.in), हालिया मिशनों (2025-26) और भर्ती अधिसूचनाओं पर आधारित है।
ISRO का इतिहास: सपनों से साकार होते विज्ञान की यात्रा
ISRO की नींव 1962 में पड़ी जब प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने डॉ. विक्रम साराभाई की सिफारिश पर भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष अनुसंधान समिति (INCOSPAR) का गठन किया। यह समिति परमाणु ऊर्जा विभाग (DAE) के अधीन थी। साराभाई को “भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम का पिता” कहा जाता है। उन्होंने कहा था – “हम अंतरिक्ष में इसलिए नहीं जाना चाहते कि दूसरे देश कर रहे हैं, बल्कि इसलिए कि यह हमारे राष्ट्रीय विकास के लिए जरूरी है।”
1963 में थुंबा इक्वेटोरियल रॉकेट लॉन्चिंग स्टेशन (TERLS) से पहला साउंडिंग रॉकेट (Nike-Apache) लॉन्च किया गया। यह फ्रांस से प्राप्त था और भारत की अंतरिक्ष यात्रा की शुरुआत थी। 1969 में 15 अगस्त को INCOSPAR को ISRO में बदल दिया गया। 1972 में स्पेस कमीशन और डिपार्टमेंट ऑफ स्पेस (DOS) बनाया गया, जिसके अधीन ISRO आ गया।
1975 में 19 अप्रैल को सोवियत रूस के सहयोग से आर्यभट्ट – भारत का पहला उपग्रह लॉन्च हुआ। यह वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए था। 1980 में 18 जुलाई को SLV-3 (Satellite Launch Vehicle-3) से रोहिणी-1B उपग्रह को सफलतापूर्वक कक्षा में स्थापित किया गया। इससे भारत स्वतंत्र रूप से उपग्रह लॉन्च करने वाला छठा देश बन गया। डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम इस प्रोजेक्ट के प्रमुख थे।
1980 के दशक में Augmented Satellite Launch Vehicle (ASLV) विकसित हुआ। 1990 के दशक में Polar Satellite Launch Vehicle (PSLV) की शुरुआत हुई, जो आज ISRO का “वर्कहॉर्स” है। 1994 में PSLV का पहला सफल उड़ान परीक्षण हुआ। Geosynchronous Satellite Launch Vehicle (GSLV) 2001 में आया, जो क्रायोजेनिक इंजन वाली भारी उपग्रहों को GEO कक्षा में ले जाता है।
2000 के दशक में ISRO ने अंतरिक्ष अन्वेषण पर फोकस किया। 2008 में चंद्रयान-1 ने चंद्रमा पर पानी की पुष्टि की। 2013 में मंगलयान (Mars Orbiter Mission) ने भारत को पहले प्रयास में मंगल की कक्षा में पहुंचाकर इतिहास रचा – एशिया का पहला देश। 2014 में मंगलयान ने 10 साल पूरे किए।
2020 के दशक में तेजी आई। 2023 में चंद्रयान-3 ने चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर सॉफ्ट लैंडिंग कर विश्व रिकॉर्ड बनाया। आदित्य-L1 (2023) सूर्य का अध्ययन कर रहा है। 2025 में NISAR (NASA-ISRO) लॉन्च हुआ, SPADEX ने स्पेस डॉकिंग प्रदर्शित की, और Axiom-4 मिशन में भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला ISS गए।
ISRO आज 13 प्रमुख केंद्रों (VSSC, URSC, SAC, LPSC आदि) के साथ काम करता है। यह सैटेलाइट, लॉन्च व्हीकल, नेविगेशन (NavIC), दूरसंचार (INSAT/GSAT) और आपदा प्रबंधन में अग्रणी है। 2025-26 में ISRO ने 1000+ घंटे के क्रायोजेनिक इंजन टेस्ट और सेमी-क्रायोजेनिक ब्रेकथ्रू हासिल किए।
प्रमुख परियोजनाएँ और उपलब्धियाँ
ISRO की सफलताएँ लागत-प्रभावी और विश्वसनीय हैं।
1. लॉन्च व्हीकल्स
- PSLV: 1993 से 50+ विदेशी उपग्रह लॉन्च। PSLV-C37 (2017) ने 104 उपग्रह एक साथ लॉन्च कर विश्व रिकॉर्ड बनाया। 2026 तक सैकड़ों मिशन पूरे।
- GSLV/LVM3: भारी उपग्रहों के लिए। LVM3-M4 ने चंद्रयान-3 लॉन्च किया। अब मानव-रेटेड।
- SSLV: छोटे उपग्रहों के लिए। 2025 में तीसरा सफल उड़ान परीक्षण।
2. सैटेलाइट कार्यक्रम
- INSAT/GSAT: मौसम, दूरसंचार, TV प्रसारण। NavIC – भारत का अपना GPS।
- IRS/Cartosat: कृषि, वन, आपदा निगरानी।
- AstroSat (2015): पहला मल्टी-वेवलेंथ स्पेस ऑब्जर्वेटरी।
3. अंतरिक्ष अन्वेषण
- चंद्रयान-1 (2008): चंद्रमा पर पानी की खोज।
- मंगलयान (2013): पहले प्रयास में मंगल कक्षा। लागत मात्र 450 करोड़।
- चंद्रयान-2 (2019): ऑर्बिटर सफल, लैंडर क्रैश लेकिन डेटा मिला।
- चंद्रयान-3 (2023): विक्रम लैंडर और प्रज्ञान रोवर ने दक्षिणी ध्रुव पर लैंडिंग की। RAMBHA-LP ने प्लाज्मा डेटा दिया।
- आदित्य-L1 (2023): L1 पॉइंट पर सूर्य अध्ययन। 2025-26 में सोलर स्टॉर्म डेटा जारी।
- XPoSat (2024): X-रे पोलरिमेट्री।
4. हालिया उपलब्धियाँ (2024-26)
- SPADEX: स्पेस डॉकिंग (जनवरी 2025) – भारत चौथा देश।
- NISAR (जुलाई 2025): NASA के साथ रडार इमेजिंग।
- Axiom-4: भारतीय अंतरिक्ष यात्री ISS मिशन।
- PSLV-C62, LVM3-M5/M6 सफल।
ISRO ने 133+ स्पेसक्राफ्ट और 104+ लॉन्च मिशन पूरे किए। यह विश्व के सबसे सस्ते लॉन्च प्रदाताओं में शामिल है।
आगामी परियोजनाएँ (2026 और उसके बाद)
2026 ISRO का “गगनयान वर्ष” है। चेयरमैन वी. नारायणन ने सात मिशनों का लक्ष्य रखा है।
1. गगनयान (मानव अंतरिक्ष उड़ान)
- 2026 में तीन अनक्रूड टेस्ट फ्लाइट (G1, G2, G3)।
- 2027 में क्रूड मिशन – चार गगनयात्री LEO में 3-7 दिन।
- LVM3 मानव-रेटेड। Vyommitra (रोबोट) टेस्ट। पैराशूट, क्रू एस्केप सिस्टम टेस्ट पूरे।
2. चंद्र मिशन
- चंद्रयान-4 (2028): सैंपल रिटर्न मिशन।
- चंद्रयान-5/LUPEX (2028): JAXA के साथ जॉइंट लैंडिंग।
- भारतीय स्पेस स्टेशन: 2035 तक।
3. अन्य
- Venus Orbiter Mission।
- Mars Lander Mission।
- SSLV लॉन्च कॉम्प्लेक्स (कुलशेखरपट्टिनम)।
- तीसरा लॉन्च पैड।
- NGLV (नॉन-टॉक्सिक लॉन्च व्हीकल)।
- 5 वर्ष में 50 लॉन्च।
4. वैज्ञानिक
- IMEx-2026: माइक्रोग्रेविटी एक्सपेरिमेंट्स।
- NavIC विस्तार, INSAT-4 सीरीज।
ये मिशन भारत को 2030 तक ग्लोबल स्पेस इकोनॉमी में 10% हिस्सा दिलाएंगे।
ISRO में करियर: युवाओं और युवा आकांक्षियों के लिए सुनहरा अवसर
ISRO युवाओं के लिए सपनों का केंद्र है। हर साल सैकड़ों इंजीनियर और वैज्ञानिक भर्ती होते हैं।
भर्ती प्रक्रिया
- Scientist/Engineer ‘SC’/’SD’: BE/BTech (मैकेनिकल, इलेक्ट्रॉनिक्स, कंप्यूटर, सिविल आदि)। लिखित परीक्षा (GATE आधारित या ISRO का पेपर) + इंटरव्यू।
- 2026 भर्ती: URSC (21 मार्च 2026) – Scientist/Engineer SC/SD, Medical Officer। SAC (जनवरी-फरवरी 2026) – 49 पद। NESAC R&D।
- वेतन: लेवल-10 (₹67,100 – ₹2,08,700) + भत्ते।
योग्यता
- न्यूनतम 60-65% अंक। GATE स्कोर प्राथमिकता।
- MTech/PhD वाले ‘SD’ के लिए।
युवा कार्यक्रम
- YUVIKA 2026: क्लास 9 छात्रों के लिए (11-22 मई 2026)। आवेदन 27 फरवरी-31 मार्च। मेरिट आधारित।
- START-2026: छात्रों के लिए स्पेस ट्रेनिंग।
- अप्रेंटिसशिप/इंटर्नशिप: VSSC, LPSC आदि में।
- IN-SPACe: निजी क्षेत्र के साथ सहयोग – स्टार्टअप्स, युवा उद्यमी।
केंद्र और क्षेत्र
- VSSC (तिरुवनंतपुरम) – रॉकेट।
- URSC (बेंगलुरु) – सैटेलाइट।
- SAC (अहमदाबाद) – एप्लीकेशन्स।
- LPSC (तिरुवनंतपुरम/महेंद्रगिरि) – प्रोपल्शन।
तैयारी टिप्स युवाओं के लिए
- 10वीं-12वीं में PCM में 90%+ अंक।
- BTech में मजबूत फाउंडेशन (IIT/NIT बेहतर)।
- GATE/CRASH कोर्स।
- प्रोजेक्ट्स, इंटर्नशिप, पेपर पब्लिश।
- ISRO वेबसाइट नियमित चेक।
- शारीरिक फिटनेस (गगनयान जैसे मिशनों के लिए)।
ISRO में काम करने का मतलब है – राष्ट्र सेवा, नवाचार और वैश्विक पहचान। युवा इंजीनियर आज PSLV, LVM3, गगनयान पर काम कर रहे हैं। निजी क्षेत्र (Skyroot, Agnikul) भी ISRO alumni से भरे हैं।
निष्कर्ष
ISRO ने 1962 से 2026 तक भारत को अंतरिक्ष महाशक्ति बनाया है। इतिहास गर्व से भरा है, उपलब्धियाँ विश्व-स्तरीय हैं, आने वाले मिशन (गगनयान, चंद्रयान-4, स्पेस स्टेशन) भविष्य उज्ज्वल बनाते हैं। युवाओं के लिए यह करियर सुनहरा अवसर है – जहां विज्ञान, सेवा और सपने मिलते हैं।
प्रधानमंत्री के “विकसित भारत 2047” और “50 लॉन्च” लक्ष्य के साथ ISRO आगे बढ़ रहा है। युवा साथियो, ISRO तुम्हारा इंतजार कर रहा है। तैयारी शुरू करो, सपने को मिशन में बदलो!
संदर्भ: ISRO.gov.in, हालिया टाइमलाइन (2025-26), भर्ती अधिसूचनाएँ।
यह लेख युवाओं को ISRO के प्रति प्रेरित करने के लिए तैयार किया गया है। अधिक जानकारी के लिए आधिकारिक वेबसाइट देखें।
