देहरादून कौथिक महोत्सव में सजेगा लोकसंस्कृति और सामाजिक सेवा का मंच

देहरादून कौथिक महोत्सव

उत्तराखंड की लोक विरासत का उत्सव

देवभूमि उत्तराखंड की लोक परंपराओं को नई पीढ़ी से जोड़ने के उद्देश्य से देहरादून में उत्तरायणी कौथिक महोत्सव 2026 का आयोजन पूरे उत्साह के साथ किया जा रहा है। यह चार दिवसीय सांस्कृतिक महोत्सव 5 से 8 फरवरी 2026 तक ऐतिहासिक परेड ग्राउंड में आयोजित होगा। आयोजन की जिम्मेदारी सेवा संकल्प (धारिणी) फाउंडेशन ने संभाली है।

देहरादून कौथिक महोत्सव

महोत्सव के दौरान उत्तराखंड की पारंपरिक लोकसंस्कृति को विशेष रूप से प्रस्तुत किया जाएगा।

झोड़ा, छोलिया जैसे लोकनृत्य, पहाड़ी लोकगीत, पारंपरिक वाद्य यंत्र और रंग-बिरंगी वेशभूषा दर्शकों को उत्तराखंड की सांस्कृतिक जड़ों से रूबरू कराएंगे।

इसके साथ ही स्थानीय हस्तशिल्प प्रदर्शनी और पारंपरिक व्यंजनों के स्टॉल भी आकर्षण का केंद्र रहेंगे।

देहरादून कौथिक महोत्सव में नामचीन कलाकारों से सजेगा मंच

कार्यक्रम के विभिन्न सत्रों में पवनदीप राजन, नरेंद्र सिंह नेगी, किशन महिपाल, अजब सिंह तोमर, खुशी जोशी और गोविंद अधिकारी.

जैसे लोकप्रिय कलाकार अपनी प्रस्तुतियों से महोत्सव को यादगार बनाएंगे।

समापन अवसर पर पुष्कर सिंह धामी के मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होने की संभावना है, जिससे आयोजन की गरिमा और बढ़ेगी।

देहरादून कौथिक महोत्सव में सामाजिक सरोकारों से जुड़ा आयोजन

इस महोत्सव की मुख्य प्रेरणा गीता धामी हैं, जो सेवा संकल्प (धारिणी) फाउंडेशन की संस्थापक ट्रस्टी हैं।

फाउंडेशन वर्षों से महिला सशक्तिकरण, बाल कल्याण, नशा मुक्ति जागरूकता और निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर जैसे सामाजिक कार्यों में सक्रिय भूमिका निभा रहा है।

बड़ी संख्या में महिलाएं इससे जुड़कर समाज सेवा में योगदान दे रही हैं।

देहरादून कौथिक महोत्सव में राज्यपाल को दिया गया औपचारिक निमंत्रण

गीता धामी ने राज्यपाल गुरमीत सिंह से भेंट कर उत्तरायणी कौथिक महोत्सव के लिए आमंत्रण दिया।

उनका मानना है कि सांस्कृतिक आयोजन समाज में एकता, पहचान और सकारात्मक सोच को मजबूत करते हैं।

पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को लाभ

विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे बड़े सांस्कृतिक आयोजनों से पर्यटन को बढ़ावा मिलता है

और स्थानीय कलाकारों, कारीगरों व व्यवसायियों को आर्थिक अवसर प्राप्त होते हैं।

यह महोत्सव उत्तराखंड सरकार की वोकल फॉर लोकल और सांस्कृतिक संरक्षण की सोच के अनुरूप भी है।

साथ ही आयोजकों ने सुरक्षा, भीड़ प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण पर विशेष ध्यान देने की बात कही है।

जनता से सहभागिता की अपील

आयोजकों ने देहरादून और आसपास के लोगों से अपील की है कि वे परिवार सहित इस सांस्कृतिक उत्सव में भाग लें, उत्तराखंड की समृद्ध लोक विरासत का आनंद उठाएं और सामाजिक-सांस्कृतिक प्रयासों को समर्थन दें।

जय देवभूमि! जय उत्तराखंड!

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