देवभूमि केलोग, देहरादून, 8 नवंबर 2025 – हिमालयी देवभूमि को वाहनों के उत्सर्जन से होने वाले नुकसान की भरपाई करने और पर्यटन राजस्व को मजबूत बनाने का सुनहरा मौका आ गया है! उत्तराखंड सरकार ने आखिरकार बाहर से राज्य में प्रवेश करने वाले वाहनों पर ‘ग्रीन टैक्स’ (हरित शुल्क) लगाने का फैसला कर लिया है। यह नीति दिसंबर 1, 2025 से लागू होगी, जो सालों से चली आ रही बहस का नतीजा है। देवभूमि के लोग के संपादक श्री भानू प्रताप सिंह ने लंबे समय से इस प्रावधान की मांग माननीय मुख्यमंत्री जी से की थी और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी तथा राज्य के अधिकारियों से पत्राचार किया था। अब माननीय सीएम की मंजूरी से यह नीति साकार हो रही है, जिससे राज्य को वाहनों के उत्सर्जन (एमिशन) के बदले अतिरिक्त राजस्व मिलेगा। इस धन से सरकार प्रदूषण कम करने की योजनाएं बना सकती है, साथ ही बेहतर सड़कें, पर्यटकों की सुरक्षा और अन्य प्रबंधन मजबूत होंगे – एक तरफ पर्यावरण संरक्षण, दूसरी तरफ विकास की गति तेज!
उत्तराखंड परिवहन विभाग द्वारा तैयार इस नीति पर सालों से चर्चा चल रही थी। पर्यावरणविदों और स्थानीय संगठनों की मांग थी कि हिमालय की संवेदनशील पारिस्थितिकी को बचाने के लिए बाहरी वाहनों पर पर्यावरण शुल्क अनिवार्य हो। देवभूमि केलोग ने भी कई बार संपादकीय और पत्रों के माध्यम से इसकी वकालत की, जिसमें सीएम को संबोधित पत्र में कहा गया था कि यह कदम उत्सर्जन के नुकसान की भरपाई के लिए राजस्व जुटाएगा, जिसका उपयोग प्रदूषण नियंत्रण योजनाओं में किया जा सके। आखिरकार, सीएम धामी की हरी झंडी के साथ कैबिनेट ने इसे मंजूरी दे दी।
ग्रीन टैक्स की मुख्य विशेषताएं: कौन देगा, कितना?
- लागू होने की तारीख: 1 दिसंबर 2025 से।
- कौन देगा? राज्य के बाहर से आने वाले सभी वाहन (कार, बस, ट्रक, कार्गो आदि)। स्थानीय वाहनों पर कोई शुल्क नहीं।
- शुल्क की दरें: वाहन के प्रकार और वजन के आधार पर भिन्न:
- छोटी कारें: ₹80 प्रति प्रवेश।
- हल्के कार्गो वाहन: ₹250।
- बसें: ₹140।
- ट्रक (वजन के अनुसार): ₹120 से ₹700 तक।
- कैसे वसूला जाएगा? राज्य की सीमाओं पर चेक-पोस्ट (जैसे हरिद्वार, ऋषिकेश, काशीपुर आदि) पर ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से। ई-चालान या ऐप के जरिए भुगतान संभव।
यह टैक्स पर्यटन-प्रधान राज्य के लिए वरदान साबित होगा। हर साल लाखों पर्यटक वाहन लाते हैं, जो हिमालयी सड़कों पर उत्सर्जन फैलाते हैं। इससे जुटने वाले राजस्व से सरकार प्रदूषण कम करने के लिए विशेष प्रावधान कर सकती है, जैसे हरित परियोजनाएं (इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग स्टेशन, वृक्षारोपण अभियान)। एक अनुमान के मुताबिक, पहले साल ही करोड़ों का राजस्व आ सकता है, जो उत्सर्जन के ‘नुकसान’ की भरपाई करेगा।
देव भूमि के लोग के प्रधान सम्पादक श्री भानू प्रताप सिंह ने कहा, “यह कदम सतत पर्यटन (सस्टेनेबल टूरिज्म) की दिशा में बड़ा प्रयास है। कई स्तर पर पत्राचार करने के उपरांत अखिरकार सालों बाद पॉलिसी लागू हो रही है जो राज्य हित में होगी, साथ ही राजस्व की पूर्ति और पर्यावरणीय प्रदूषण की प्रतिपूर्ति और इंतजाम करने में सहायक होगी I जुटाए गए फंड से देवभूमि को स्वच्छ और सुरक्षित रखने की योजनाएं बनेगी।” लेकिन कुछ पर्यटक संगठनों ने आपत्ति जताई है, कि यह यात्रा महंगी कर सकता है। सरकार ने स्पष्ट किया कि टैक्स न्यूनतम है और स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देगा। यह नीति अभी प्रारंभिक चरण में है, और समय व अनुभव के साथ इसमें और बदलाव अपनाए जा सकते हैं, ताकि यह और प्रभावी बने।
संपादकीय: Takana Times टीम | #UttarakhandGreenTax #SustainableTourism #DevbhoomiClean)*

