देहरादून की आवाज़ बन रहा जन चेतना जागृति मंच: जनता की शिकायतों को बनाता है सरकारी दफ्तरों तक पहुंच, अनिरुद्ध डोबरियाल की अगुवाई में सिविल सोसाइटी का अनुकरणीय उदाहरण

देहरादून। देहरादून की सड़कों, गलियों और मोहल्लों में जहां आम आदमी की छोटी-बड़ी समस्याएं अक्सर दब जाती हैं, वहां एक संगठन चुपचाप लेकिन लगातार काम कर रहा है – जन चेतना जागृति मंच। यह एनजीओ न सिर्फ लोगों की आवाज़ बन रहा है, बल्कि उन्हें एकजुट करके सरकारी अफसरों और विभागों तक उनकी शिकायतें पहुंचा रहा है। और सबसे खास बात, यह सब पूरी तरह गैर-राजनीतिक तरीके से हो रहा है।

मंच के अध्यक्ष अनिरुद्ध डोबरियाल बताते हैं, “हमारा मकसद सिर्फ शिकायत दर्ज कराना नहीं, बल्कि समयबद्ध तरीके से उनका समाधान करवाना है। लोग अकेले अफसरों के चक्कर काटते थक जाते हैं, लेकिन जब सामूहिक रूप से आवाज उठती है तो काम तेजी से होता है।”

हर रविवार को मंच की बैठकें होती हैं। सदस्य इकट्ठा होते हैं, शहर की ताजा समस्याओं पर चर्चा करते हैं – चाहे वह सड़क की गड्ढे हों, जलभराव हो, बिजली-पानी की किल्लत हो या फिर कोई अन्य सार्वजनिक मुद्दा। बैठक में आम नागरिक अपनी शिकायतें रखते हैं, फिर मंच की टीम उन्हें व्यवस्थित करके संबंधित विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों तक पहुंचाती है। फॉलो-अप किया जाता है और तय समयसीमा में काम पूरा करवाने का दबाव बनाया जाता है। यह एक तरह का प्रेशर ग्रुप है, लेकिन सकारात्मक और रचनात्मक तरीके से।

अनिरुद्ध डोबरियाल की अगुवाई में यह मंच पिछले कुछ वर्षों में देहरादून की कई समस्याओं को सुलझाने में सफल रहा है। स्थानीय लोग इसे ‘जनता का दोस्त’ कहने लगे हैं। एक सदस्य ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, “पहले हम शिकायत लिखकर थाने या नगर निगम जाते थे, जवाब मिलता नहीं था। अब मंच के जरिए जब 20-30 लोग साथ जाते हैं तो अफसर सुनते हैं और काम होता है।”

मंच ने जागरूकता फैलाने में भी अहम भूमिका निभाई है। लोग अब समझ रहे हैं कि सिविल सोसाइटी क्या होती है – सरकार और जनता के बीच एक पुल, जो जवाबदेही तय करती है। यह मंच अन्य राज्यों और शहरों के लिए भी एक मिसाल बन रहा है। जहां राजनीतिक दलों की भागदौड़ में जनता की असली समस्याएं पीछे छूट जाती हैं, वहां जन चेतना जागृति मंच ने साबित किया है कि गैर-राजनीतिक, समर्पित प्रयास से भी बड़ा बदलाव लाया जा सकता है।

संरक्षकों और सदस्यों का कहना है कि मंच का फोकस सिर्फ समस्या सुलझाने पर नहीं, बल्कि लोगों में आपसी एकता और जिम्मेदारी का भाव जगाने पर भी है। “जब लोग एकजुट होते हैं तो सरकार को जवाब देना पड़ता है। हमारा काम यही है – जनता को सशक्त बनाना और अधिकारियों को जवाबदेह।”

देहरादून जैसे शहर में जहां विकास की रफ्तार तेज है लेकिन बुनियादी सुविधाओं में कमी बनी हुई है, ऐसे संगठनों की जरूरत और बढ़ जाती है। जन चेतना जागृति मंच न सिर्फ देहरादून की आवाज बन रहा है, बल्कि पूरे उत्तराखंड के लिए एक प्रेरणा स्रोत भी। अनिरुद्ध डोबरियाल और उनकी टीम का यह प्रयास दिखाता है कि सच्ची सेवा और समर्पण से कितना कुछ बदला जा सकता है – बिना किसी राजनीतिक रंग के, सिर्फ जनहित के लिए।

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