कैलास के दक्षिण में बर्फ गायब, भक्त बोले- ‘यात्रा की महिमा शब्दातीत’

कैलास के दक्षिण में बर्फ गायब, भक्त बोले- ‘यात्रा की महिमा शब्दातीत’

पांच वर्ष के लंबे अंतराल के बाद शुरू हुई कैलाश मानसरोवर यात्रा के पहले दल ने पवित्र दर्शन किए। यात्रियों ने इसे एक अविस्मरणीय और अलौकिक अनुभव बताया। उनके अनुसार, दर्शन से प्राप्त आध्यात्मिक ऊर्जा और शांति को शब्दों में व्यक्त करना असंभव है।

सुहावना मौसम और बेहतरीन व्यवस्थाएं

कई यात्रियों ने बताया कि कैलाश के दक्षिणी क्षेत्र में बर्फ की अनुपस्थिति के कारण मौसम बेहद अनुकूल और सुहावना रहा। इससे महादेव के भव्य धाम के दर्शन और अधिक मनोरम हो गए। यात्रियों ने सरकार द्वारा की गई व्यवस्थाओं की जमकर सराहना की, जिसमें आवास, परिवहन और अन्य सुविधाएं शामिल थीं।

पिथौरागढ़ में सात दिन का प्रवास

यात्रा के दौरान दल ने पिथौरागढ़ जिले में सात दिन बिताए, जहां स्थानीय लोगों ने उनका हार्दिक स्वागत किया। यात्रियों ने स्थानीय संस्कृति और आतिथ्य की प्रशंसा की।

चौकोड़ी में भव्य स्वागत

शनिवार की शाम को पहला दल चौकोड़ी पहुंचा, जहां उनका गाजे-बाजे और फूल-मालाओं के साथ जोरदार स्वागत हुआ। स्थानीय महिलाओं ने कुमाऊंनी परिधानों में सजकर यात्रियों का टीका लगाकर और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ अभिनंदन किया।

यात्रियों का अनुभव

यात्रियों ने एक स्वर में कहा कि कैलाश मानसरोवर की यात्रा उनके जीवन का सबसे अनमोल अनुभव है। दर्शन से मिली आध्यात्मिक शांति और ऊर्जा ने उन्हें अभिभूत कर दिया। एक यात्री ने कहा, “यह यात्रा केवल दर्शन नहीं, बल्कि आत्मा का साक्षात्कार है।”

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