नैनीताल की झील किनारे स्थित दुर्गा साह नगर पालिका लाइब्रेरी, जो करीब 90 साल पुरानी है, अपनी बदहाल स्थिति के कारण चर्चा में है। अंग्रेजों के दौर से शिक्षा के केंद्र के रूप में प्रसिद्ध नैनीताल में 1933-34 में स्थानीय निवासी मोहन लाल साह ने अपने पिता दुर्गा साह के नाम पर इस पुस्तकालय की स्थापना के लिए पांच हजार रुपये दान दिए थे। पूरी तरह लकड़ी से निर्मित इस पुस्तकालय में वेद, पुराण, पौराणिक ग्रंथ, गजेटियर समेत दुर्लभ पुस्तकों का संग्रह है। सुबह और शाम लाउडस्पीकर पर समाचार प्रसारण के लिए भी यह लाइब्रेरी जानी जाती है, जिसे उत्तर भारत की बेहतरीन पुस्तकालयों में गिना जाता था।
जीर्णोद्धार में खर्च हुए डेढ़ करोड़, पर भवन ढहने की कगार पर
वर्ष 2016 में नगर के हेरिटेज भवनों की मरम्मत के तहत लाइब्रेरी के जीर्णोद्धार की योजना बनी। एशियाई विकास बैंक (एडीबी) द्वारा वित्त पोषित इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट इन्वेस्टमेंट प्रोग्राम फॉर टूरिज्म के तहत डेढ़ करोड़ रुपये की लागत से कार्य शुरू हुआ। सात साल बाद, 2023-24 में मरम्मत पूरी होकर भवन नगर पालिका को सौंपा गया। लेकिन मात्र डेढ़ साल में ही भवन की स्थिति जर्जर हो गई है। पुस्तकालय से सटा सेल्फी प्वाइंट और झील की ओर का हिस्सा ढहने की कगार पर है। लकड़ी और शीशे को रस्सियों से बांधकर और म्यूरल से ढककर गिरने से रोकने की अस्थायी कोशिश की गई है, जो किसी बड़े हादसे को न्योता दे सकता है।
लकड़ी की गुणवत्ता पर सवाल
पालिकाध्यक्ष डॉ. सरस्वती खेतवाल ने बताया कि जीर्णोद्धार में इस्तेमाल लकड़ी की गुणवत्ता और चयन में कमी के कारण भवन संवेदनशील हो गया है। पालिका ने कार्य की गुणवत्ता को लेकर शासन स्तर पर पत्राचार शुरू किया है और निजी संस्था से बातचीत कर दोबारा जीर्णोद्धार की योजना बनाई जा रही है।
रोजाना 50 से अधिक लोग पहुंचते हैं
यह ऐतिहासिक लाइब्रेरी सुबह 7:30 से 10:30 और शाम 5:00 से रात 8:00 बजे तक खुलती है। निशुल्क प्रवेश के कारण स्कूल-कॉलेज के छात्रों से लेकर बुजुर्गों तक, रोजाना 50 से अधिक लोग यहां आते हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं की पुस्तकें, हिंदी-अंग्रेजी अखबार और मैग्जीन उपलब्ध होने से यह लाइब्रेरी स्थानीय लोगों के लिए महत्वपूर्ण केंद्र है।
तत्काल कार्रवाई की जरूरत
लाइब्रेरी की मौजूदा स्थिति न केवल नैनीताल की हेरिटेज धरोहर को नुकसान पहुंचा रही है, बल्कि यह आगंतुकों के लिए भी खतरा बन रही है। पालिका और प्रशासन से अपेक्षा है कि गुणवत्तापूर्ण जीर्णोद्धार के लिए त्वरित कदम उठाए जाएं, ताकि इस ऐतिहासिक धरोहर को संरक्षित किया जा सके।