नाबालिग दुष्कर्म केस में सख्त रुख कोर्ट ने दोषी को 20 साल का कारावास

नाबालिग से दुष्कर्म मामले

शादी का झांसा देकर नाबालिग से दुष्कर्म मामले, कोर्ट ने दोषी को 20 साल के कठोर कारावास की सजा

देहरादून में विशेष न्यायाधीश (पोक्सो) अर्चना सागर की अदालत ने नाबालिग से दुष्कर्म मामले के दोषी संजय को 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई

इसके साथ ही अदालत ने दोषी पर 20 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। इसके साथ ही अदालत ने दोषी पर 20 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।

जुर्माना अदा न करने पर दोषी को एक माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।

पीड़िता को तीन लाख रुपये प्रतिकर देने का आदेश ,नाबालिग से दुष्कर्म मामले

कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को निर्देश दिए हैं कि राज्य सरकार की योजना के तहत पीड़िता को तीन लाख रुपये का प्रतिकर दिलाया जाए।


अदालत ने स्पष्ट किया कि पीड़िता को आर्थिक और मानसिक संबल देना राज्य की जिम्मेदारी है।

शादी का झांसा देकर किया गया दुष्कर्म, तीन दिन तक बनाया बंधक

कोर्ट में दिए गए बयानों के अनुसार, दोषी संजय ने पीड़िता को शादी का झांसा देकर अगवा किया।

इसके बाद वह उसे रायपुर क्षेत्र के एक किराये के कमरे में ले गया।

वहां उसने तीन दिन तक नाबालिग के साथ लगातार दुष्कर्म किया।

कूड़ा फेंकने गई थी पीड़िता, वहीं से ले गया आरोपी

पीड़िता ने बताया कि वह एक दिन कूड़ा फेंकने बाहर गई थी।
उसी दौरान संजय उससे मिला और शादी की बात कहकर अपने साथ ले गया।
आरोपी ने उसका मोबाइल फोन भी अपने कब्जे में ले लिया और सिम कार्ड निकाल दिया, ताकि वह किसी से संपर्क न कर सके।


नाबालिग से दुष्कर्म मामले आरोपी पहले से शादीशुदा, चार बच्चों का पिता निकला

पीड़िता ने कोर्ट को बताया कि आरोपी ने खुद को अविवाहित बताया था।


हालांकि, बाद में उसे पता चला कि संजय पहले से शादीशुदा है और उसके चार बच्चे भी हैं
यह तथ्य सामने आने के बाद मामला और गंभीर हो गया।


2022 में दर्ज हुआ था मामला, उसी दिन हुई गिरफ्तारी

मामले में पीड़िता की मां ने 24 फरवरी 2022 को शहर कोतवाली में शिकायत दर्ज कराई थी।


उन्होंने बताया कि उनकी बेटी 22 फरवरी से लापता थी।


पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए पीड़िता को बरामद किया और उसी दिन आरोपी संजय को गिरफ्तार कर लिया।


पैरोकार कांस्टेबल की भूमिका रही अहम

पूरे मामले में पैरोकार कांस्टेबल कोमल ने गवाही और केस की पैरवी में अहम भूमिका निभाई।

उनकी सक्रियता से अभियोजन पक्ष ने मजबूत साक्ष्य पेश किए, जिसके आधार पर कोर्ट ने दोष सिद्ध माना

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