हल्द्वानी के पानीयाली में बाघ का खौफनाक हमला: 53 वर्षीय विधवा कमला फर्त्याल की मौत, वन विभाग और प्रशासन की घोर नाकामी उजागर!15 दिन में दूसरी घटना, आदमखोर बाघ अब भी खुले में घूम रहा – जनता में आक्रोश, सड़क जाम

हल्द्वानी के पानीयाली में बाघ का खौफनाक हमला: 53 वर्षीय विधवा कमला फर्त्याल की मौत, वन विभाग और प्रशासन की घोर नाकामी उजागर!15 दिन में दूसरी घटना, आदमखोर बाघ अब भी खुले में घूम रहा – जनता में आक्रोश, सड़क जाम

हल्द्वानी (25 फरवरी 2026)By B P Singh: नैनीताल जिले के फतेहपुर रेंज के कठघरिया-पानीयाली जंगल क्षेत्र में एक बार फिर बाघ ने आम आदमी पर हमला बोल दिया। घास काटने गई 53 वर्षीय विधवा कमला फर्त्याल को बाघ ने अपना शिकार बना लिया। महिला का क्षत-विक्षत शव घटनास्थल से करीब 2 किलोमीटर अंदर जंगल में मिला। परिवार और ग्रामीणों का रो-रोकर बुरा हाल है।

सुबह करीब 7 बजे कमला फर्त्याल अकेली जंगल गई थीं। जब वे वापस नहीं लौटीं तो परिवार ने खोज शुरू की। देर शाम तक जंगल की गहराई में उनका शव बरामद हुआ। वन विभाग और पुलिस की टीम ने सर्च ऑपरेशन चलाया। प्रारंभिक जांच में बाघ के हमले की पुष्टि हुई है। ग्रामीणों ने शव के साथ सड़क जाम कर दिया और नारे लगाए – “बाघ को आदमखोर घोषित करो, वरना हम जंगल नहीं जाने देंगे!”

यह केवल एक घटना नहीं, दोहराई जा रही नाकामी का सिलसिला है
सिर्फ 15 दिन पहले (12 फरवरी) इसी फतेहपुर रेंज के लामाचौड़ इलाके में गंगा देवी (66) नाम की महिला को बाघ ने तीन अन्य महिलाओं के सामने घसीट लिया था। उनका शव भी 3 किमी अंदर मिला था। उस समय वन विभाग ने कैमरे लगाए, पिंजरे लगाए, खून से सनी चादर लगाकर बाघ पकड़ने का दावा किया। लेकिन आज फिर वही कहानी! बाघ अब भी आजाद घूम रहा है।

उत्तराखंड में वन्यजीव हमलों का सिलसिला, सरकार की चुप्पी
2025-26 में राज्य भर में वन्यजीव हमलों से दर्जनों मौतें हो चुकी हैं। बाघ-तेंदुए-भालू ने सैकड़ों लोगों को घायल किया। बियर हमलों में 74 मामले, तेंदुए के 12 मौतें, बाघ के कई मामले। पहाड़ी गांव ‘भूतिया गांव’ बनते जा रहे हैं। महिलाएं चारा-लकड़ी के लिए जंगल जाती हैं तो मौत का खतरा मोल लेती हैं।

वन विभाग की फेलियर और प्रशासन की बेरुखी
हर बार घटना के बाद डीएम, डीएफओ मीटिंग करते हैं, रिपोर्ट मांगते हैं, निर्देश जारी करते हैं। लेकिन जमीनी स्तर पर कुछ नहीं। पानीयाली में भी पिछले हमले के बाद ‘हाई अलर्ट’ घोषित किया गया था, फिर भी कोई सुरक्षा नहीं। रेंजर प्रदीप अंगोला और फतेहपुर रेंज के अधिकारी सिर्फ बयानबाजी कर रहे हैं।

जंगल कटाई और भ्रष्टाचार की वजह से आम आदमी पर कहर
विशेषज्ञों और स्थानीय लोगों का आरोप है कि जंगलों की अंधाधुंध कटाई, अवैध खनन और निर्माण कार्यों ने वन्यजीवों का निवास क्षेत्र छीन लिया है। बाघ-तेंदुए गांवों की ओर मजबूर हो रहे हैं। वन विभाग में भ्रष्टाचार की कहानियां पुरानी नहीं हैं – कॉर्बेट टाइगर रिजर्व में अवैध पेड़ कटाई के मामले CBI तक पहुंचे, अधिकारी पर मुकदमे, लेकिन सजा किसी को नहीं।
रामनगर-हल्द्वानी के आसपास भी ठेकेदारों और अफसरों की मिलीभगत से जंगल साफ हो रहे हैं। नतीजा? आम गरीब किसान-महिलाएं शिकार बन रही हैं।

देहरादून में बैठे जिम्मेदार ‘मीटिंग-मीटिंग’ खेल रहे, जनता मर रही
वन मंत्री और पीसीसीएफ देहरादून में एसी कमरों में बैठकर प्रेस रिलीज जारी करते हैं, हेलीकॉप्टर से सर्वे करते हैं, लेकिन पानीयाली, लामाचौड़, पीपलपोखरा के लोग रोज मौत से दो-चार हो रहे हैं। कांग्रेस ने तीखा हमला बोला – “प्रशासन की पूरी नाकामी है। अधिकारी जिम्मेदार हैं, उन्हें सस्पेंड करो!” ग्रामीणों का सवाल – “कब तक मीटिंगें होंगी? कब तक आम आदमी की जान जाएगी?”

जनता की मांग

  • बाघ को तुरंत आदमखोर घोषित कर शूटआउट की अनुमति।
  • वन विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई।
  • प्रभावित परिवार को 50 लाख मुआवजा।
  • जंगल की सुरक्षा के लिए स्थानीय युवाओं को शूटर ट्रेनिंग।
  • जंगल कटाई पर सख्त रोक और भ्रष्टाचार की जांच।

यह घटना उत्तराखंड के मानव-वन्यजीव संघर्ष की चरम सीमा दिखाती है। अगर सरकार नहीं जागी तो पहाड़ी गांव खाली हो जाएंगे।

(यह रिपोर्ट स्थानीय स्रोतों, ग्रामीणों और विपक्षी बयानों पर आधारित है।)

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