देहरादून, 24 नवंबर 2025* – लेटरल एंट्री के विरोध में युवा मुखर हो रहे हैं, आउटसोर्स के माध्यम से सीधे भरे जा रहे पद पर युवाओं का कहना है कि “देश में हजारों फर्जी यूनिवर्सिटी और डिग्री मिल चल रही हैं। इनकी डिग्री वेरीफाई करना नामुमकिन है। इसलिए सिर्फ डिग्री दिखाकर सरकारी अधिकारी बनाना पूरी तरह बंद होना चाहिए। बिना बेसिक कैपेबिलिटी टेस्ट के लेटरल एंट्री का मतलब है – फर्जी डिग्री वालों को सीधे अधिकारी डॉक्टर बनाने का लाइसेंस देना।”*
फर्जी डिग्री का भयानक सच – तथ्य जो युवा बार-बार दोहरा रहे हैं
- UGC ने 2024-25 में 23 फर्जी यूनिवर्सिटी की लिस्ट जारी की (जिनमें से कई उत्तर भारत में हैं)। इनके लाखों डिग्री धारक घूम रहे हैं।
- 2025 में उत्तराखंड में ही 1,200 से ज्यादा सरकारी कर्मचारियों (शिक्षक, क्लर्क, डॉक्टर) की डिग्री संदिग्ध पाई गईं। जांच अभी चल रही है।
- राजस्थान, उत्तर प्रदेश, बिहार, ओडिशा से हजारों BA, B.Tech, MBA की फर्जी डिग्रियां 5,000 से 50,000 रुपये में मिल रही हैं। ऑनलाइन वेरीफिकेशन पोर्टल पर भी फर्जी डेटा अपलोड कर दिया जाता है।
- एक हालिया CBI केस (उत्तराखंड UKSSSC पेपर लीक से जुड़ा): एक ही व्यक्ति ने 4 अलग-अलग राज्यों की 6 फर्जी डिग्रियां लगाकर तीन भर्तियों में आवेदन किया था।
- कई यूनिवर्सिटी का डेटाबेस 10-15 साल पुराना खराब हो चुका है – वेरीफिकेशन लेटर भेजो तो 6-8 महीने बाद जवाब आता है, या आता ही नहीं।
युवाओं का सीधा सवाल UKPSC से
“जब डिग्री वेरीफाई करना ही असंभव है,
तो सिर्फ डिग्री दिखाकर अधिकारी कैसे बनने दिया जा सकता है?
क्या #UKPSC के कार्मिक यह गारंटी लेंगे कि लेटरल एंट्री से आने वाला हर व्यक्ति 100% जेनुइन डिग्री वाला है?”
इसलिए सिर्फ एक ही समाधान बचा है
हर लेटरल एंट्री उम्मीदवार को 2 घंटे का बेसिक कैपेबिलिटी टेस्ट देना अनिवार्य हो
(100-150 अंकों का ऑब्जेक्टिव पेपर – पास/फेल आधारित, रैंकिंग नहीं)
युवाओं का तर्क बिल्कुल साफ है:
“जिस व्यक्ति के पास सचमुच ज्ञान और योग्यता है, वह 2 घंटे का पेपर आसानी से पास कर लेगा। जो फर्जी डिग्री लेकर आया है, वह पकड़ा जाएगा। इससे न फर्जीवाड़ा रुकेगा, न ही मेहनत करने वाले युवाओं के साथ अन्याय होगा।”
अब तक की स्थिति
- उत्तराखंड बेरोजगार महासंघ ने जल्द सचिवालय घेराव का ऐलान किया है।
- UKPSC के एक वरिष्ठ अधिकारी ने ऑफ-रेकार्ड कहा: “फर्जी डिग्री की समस्या वाकई बहुत बड़ी है। बेसिक टेस्ट सबसे आसान और प्रभावी समाधान है।”
युवाओं का अंतिम सवाल:
“जब प्राइवेट जॉब में भी अब लिखित टेस्ट होता है,
तो सरकारी अधिकारी बनने के लिए 2 घंटे का टेस्ट क्यों नहीं हो सकता?”
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