देवभूमि के लोग, 10 अक्टूबर 2025 –
बॉलीवुड के सुपरस्टार आर. माधवन, जिन्हें ‘मदवान’ के नाम से जाना जाता है, ने हाल ही में पेरेंटिंग को लेकर एक ऐसी सलाह साझा की है जो हर माता-पिता के लिए ‘गेम-चेंजर’ साबित हो सकती है। अपने कनाडा स्टडी डेज के एक अनुभव से प्रेरित होकर, माधवन ने बताया कि बच्चों को अनुशासित और सफल बनाने का सबसे बड़ा राज है – ‘बच्चे को फ्री टाइम न दें’। यह एडवाइस उन्होंने अपनी कैनेडियन होस्ट मदर से ली थी और आज भी अपने बेटे वेदांत पर अमल कर रहे हैं।
माधवन ने हाल ही में एडेलवाइस एसेट मैनेजमेंट की सीईओ राधिका गुप्ता के साथ ‘100 ईयर लाइफ प्रोजेक्ट’ पॉडकास्ट पर खुलकर बात की। उन्होंने बताया कि कनाडा के एक छोटे शहर में पढ़ाई के दौरान उन्होंने ड्रग्स, अल्कोहल और टीन प्रेग्नेंसी जैसी समस्याओं का सामना किया। लेकिन जिस परिवार के साथ वे रहते थे, उनके बच्चे हमेशा ग्राउंडेड और सेफ रहते थे। होस्ट मदर ने सलाह दी, “बच्चे को 15-16 साल की उम्र तक फ्री टाइम न दें। उन्हें उनकी पसंद की एक्टिविटी में व्यस्त रखें, चाहे इंटरेस्ट बदल जाए, लेकिन कमिटमेंट बना रहे।”
माधवन ने इसे अपनाते हुए बेटे वेदांत को स्विमिंग, स्पोर्ट्स और अन्य हॉबीज में बिजी रखा। नतीजा? वेदांत ने मलेशियन ओपन में 5 गोल्ड मेडल्स, डेनिश ओपन में गोल्ड-सिल्वर जीते और कॉमनवेल्थ यूथ गेम्स में भारत का नाम रोशन किया। माधवन कहते हैं, “यह स्ट्रक्चर न सिर्फ नेगेटिव इन्फ्लुएंस से बचाता है, बल्कि बच्चों में सेल्फ-डिसिप्लिन और पर्पस क्रिएट करता है।”
माधवन की पेरेंटिंग टिप्स: अनुशासन और सक्सेस का रोडमैप
माधवन की एडवाइस सिर्फ थ्योरी नहीं, बल्कि प्रैक्टिकल है। यहां उनके कुछ मुख्य पॉइंट्स:
- स्ट्रक्चर्ड रूटीन बनाएं: बच्चों को फ्री टाइम न दें, लेकिन ओवरलोड भी न करें। गाइडेड एक्टिविटीज जैसे रीडिंग, स्पोर्ट्स, फैमिली कुकिंग या पेट केयर दें। रिसर्च भी कहती है कि रूटीन से बच्चों का इमोशनल बैलेंस बेहतर होता है।
- उनकी पैशन को सपोर्ट करें: माधवन कहते हैं, “वेदांत अगर सेलो प्लेयर बनना चाहता तो हम सपोर्ट करते।” बच्चों के ड्रीम्स को किल न करें, बल्कि गाइड करें।
- क्वालिटी टाइम दें: प्रेजेंट्स से ज्यादा प्रेजेंस इंपॉर्टेंट। माधवन बिजी शेड्यूल के बावजूद वेदांत से डीप कन्वर्सेशन करते हैं और घर को जजमेंट-फ्री जोन बनाते हैं।
- डिसिप्लिन को एंजॉयमेंट से जोड़ें: एक्टिविटीज फन रखें, न कि बोझ। वेदांत का रूटीन 4 AM से 8 PM तक है, लेकिन यह उसके लिए ‘एक्सरसाइज’ जैसा है – यहां तक कि खाना खाना भी फोकस्ड होता है।
- ओपिनियंस न थोपें: बच्चों को 5 साल की उम्र से ही थिंकिंग इंडिविजुअल ट्रीट करें। उनकी बात सुनें, ताकि वे प्रॉब्लम्स शेयर करने में कंफर्टेबल फील करें।
यह एडवाइस देवभूमि के माता-पिताओं के लिए खासतौर पर रेलेवेंट है, जहां पहाड़ी जीवनशैली में बच्चों को नेचर और स्पोर्ट्स से जोड़ना आसान है। माधवन खुद कहते हैं, “सोशल मीडिया के जमाने में बच्चे हाइपर-अवेयर हैं, इसलिए सेफ एनवायरनमेंट और शेयर्ड एक्सपीरियंस ही असली की है।”
(सोर्स: टाइम्स ऑफ इंडिया, इकोनॉमिक टाइम्स)
