श्रीनगर के नागेश्वर गली स्थित प्राचीन भैरवनाथ-गोरक्षनाथ मंदिर में श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया गया गुरु पूर्णिमा महोत्सव, भव्य भंडारे में उमड़ा जनसैलाब

श्रीनगर के नागेश्वर गली स्थित प्राचीन भैरवनाथ-गोरक्षनाथ मंदिर में श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया गया गुरु पूर्णिमा महोत्सव, भव्य भंडारे में उमड़ा जनसैलाब

श्रीनगर (पौड़ी गढ़वाल)। श्रीनगर की नागेश्वर गली स्थित प्राचीन भैरवनाथ एवं गुरु गोरक्षनाथ मंदिर में गुरु पूर्णिमा महोत्सव इस वर्ष भी श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ धूमधाम से मनाया गया। इस अवसर पर मंदिर परिसर को आकर्षक ढंग से सजाया गया तथा विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण कर गुरु परंपरा के प्रति अपनी आस्था व्यक्त की।

मंदिर में सुबह से ही श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। भक्तों ने गुरु गोरक्षनाथ एवं भैरवनाथ के दर्शन कर पूजा-अर्चना की और प्रदेश तथा देश की सुख-समृद्धि एवं जनकल्याण की कामना की। पिछले वर्षों की भांति इस वर्ष भी महोत्सव में श्रद्धालुओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि देखने को मिली।

मंदिर की देखरेख एवं व्यवस्थाओं का दायित्व निभा रहे श्री मनोज बंगवाल की सेवा, समर्पण और धार्मिक आस्था की श्रद्धालुओं ने सराहना की। स्थानीय लोगों का कहना है कि उनके अथक प्रयासों से मंदिर में श्रद्धालुओं की आस्था लगातार बढ़ रही है और यह प्राचीन मंदिर क्षेत्र की धार्मिक एवं सांस्कृतिक पहचान के रूप में स्थापित होता जा रहा है।

महंत नरेश कुमार भारती हुए सम्मानित

गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर जय शिव गोरखनाथ गढ़खालेश्वर महादेव मंदिर, भटोली के महंत श्री नरेश कुमार भारती भी विशेष रूप से उपस्थित रहे। मंदिर की साज-सज्जा, गुरु परंपरा के संरक्षण तथा धार्मिक सेवा के प्रति उनके समर्पण को देखते हुए उन्हें “गुरु पूर्णिमा महोत्सव सम्मान” से सम्मानित किया गया।

गुरु पूर्णिमा का महत्व बताया

इस अवसर पर महंत श्री नरेश कुमार भारती ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि गुरु पूर्णिमा केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति में गुरु के प्रति श्रद्धा, सम्मान और ज्ञान की परंपरा का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को अपने जीवन में गुरु के महत्व को समझते हुए गुरु पूर्णिमा अवश्य मनानी चाहिए।

उन्होंने बताया कि भारतीय परंपरा के अनुसार इसी दिन महर्षि वेदव्यास का जन्म हुआ था, जिन्होंने महाभारत सहित अनेक ग्रंथों की रचना कर मानवता को ज्ञान का अमूल्य भंडार प्रदान किया। उन्होंने नाथ संप्रदाय की परंपराओं का उल्लेख करते हुए गुरु मत्स्येन्द्रनाथ और गुरु गोरक्षनाथ से जुड़ी धार्मिक मान्यताओं का भी विस्तार से वर्णन किया तथा गुरु-शिष्य परंपरा की महत्ता पर प्रकाश डाला।

संतों का मिला आशीर्वाद

कार्यक्रम में ब्रह्मलीन समाधिस्थ गुरुदेव चेतन नाथ जी महाराज के उपदेशों और जनकल्याण के संदेशों का स्मरण किया गया। इस अवसर पर योगी चौरंगी नाथ जी, सीताराम भोपाल नाथ जी एवं श्याम गिरी महाराज सहित अनेक साधु-संत उपस्थित रहे। संतों ने श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक जीवन, सेवा, सदाचार और मानव कल्याण का संदेश दिया।

बड़ी संख्या में श्रद्धालु रहे उपस्थित

महोत्सव में दिगम्बर भट्ट, किशोर चमोली, संजय जैन, अभम पंवार, सुधीर भट्ट, कालीचरण, महिपाल सिंह बिष्ट, आनन्द सिंह भण्डारी, मोनू भण्डारी, गोपाल कृष्ण धिल्डियाल सहित श्रीनगर के अनेक गणमान्य नागरिक एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

पूरे आयोजन के दौरान धार्मिक भजन-कीर्तन, गुरु वंदना और भंडारे का आयोजन श्रद्धा एवं भक्ति के वातावरण में संपन्न हुआ। श्रद्धालुओं ने इसे सामाजिक समरसता, गुरु परंपरा और आध्यात्मिक चेतना को मजबूत करने वाला प्रेरणादायी आयोजन बताया।

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