भारत में कैंसर के मामले लगातार बढ़े, उत्तराखंड में भी चिंता; 30 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों की स्क्रीनिंग पर जोर

भारत में कैंसर के मामले लगातार बढ़े, उत्तराखंड में भी चिंता; 30 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों की स्क्रीनिंग पर जोर

तेजी से बड़ रहा है देशभर में कैंसर, गंभीर बीमारियों के भी केस बड़े, खानपान- बदलती जीवन शैली बड़ा कारण, कम शारीरिक काम वाले शहरों में गांवों के मुकाबले मामले ज्यादा।

देवभूमि के लोग | विशेष रिपोर्ट

सरकारी आंकड़ों में कैंसर के बढ़ते बोझ के संकेत; मुंह के घाव से लेकर असामान्य रक्तस्राव तक, शरीर के चेतावनी संकेतों को न करें नजरअंदाज। तंबाकू से दूरी, समय पर जांच और WHO की बचाव संबंधी सलाह पर अमल जरूरी।

नई दिल्ली/देहरादून। कैंसर भारत के सामने उभरती प्रमुख सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौतियों में शामिल है। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) के राष्ट्रीय कैंसर रजिस्ट्री कार्यक्रम (NCRP) के अनुमानों के अनुसार, देश में सभी प्रकार के कैंसर के नए मामलों की अनुमानित संख्या 2014 में करीब 10.9 लाख से बढ़कर 2024 में लगभग 15.7 लाख हो गई। उत्तराखंड में भी इसी अवधि के दौरान अनुमानित मामलों में वृद्धि दर्ज की गई है। विशेषज्ञों के अनुसार, कैंसर के खिलाफ लड़ाई में केवल उपचार ही नहीं, बल्कि जोखिम कारकों पर नियंत्रण, समय पर पहचान और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच भी महत्वपूर्ण है।

भारत में कैंसर के अनुमानित मामले कितने बढ़े?

भारत सरकार ने 6 फरवरी 2026 को लोकसभा में प्रस्तुत जानकारी में ICMR-NCRP के राज्यवार आंकड़े साझा किए। इनके अनुसार, देश में कैंसर के अनुमानित नए मामलों की संख्या 2014 के लगभग 10.9 लाख से बढ़कर 2024 में लगभग 15.7 लाख तक पहुंच गई।

वर्षभारत में अनुमानित नए मामले
201410,86,783
202013,92,179
202114,26,447
202214,61,427
202314,96,972
202415,33,055

महत्वपूर्ण तथ्य: ये अनुमानित नए मामलों के आंकड़े हैं, न कि देश में उस वर्ष कैंसर से जीवित सभी मरीजों की कुल संख्या। रिपोर्ट किए गए मामलों में वृद्धि का अर्थ यह नहीं कि इसके पीछे केवल एक कारण है। केंद्र सरकार के अनुसार, बेहतर जांच तकनीक, जीवन प्रत्याशा में वृद्धि, बुजुर्ग आबादी का बढ़ना, स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता और तंबाकू, शराब, अस्वस्थ खानपान तथा शारीरिक निष्क्रियता जैसे जोखिम कारक भी इस प्रवृत्ति को प्रभावित करते हैं।

उत्तराखंड में भी बढ़ रहे हैं कैंसर के अनुमानित मामले

उत्तराखंड में कैंसर के अनुमानित नए मामलों की संख्या 2014 में 11,240 थी, जो 2024 में बढ़कर 12,642 हो गई। यानी इन दस वर्षों में अनुमानित वार्षिक मामलों में लगभग 12.5 प्रतिशत की वृद्धि हुई।

वर्षउत्तराखंड में अनुमानित नए मामले
201411,240
201813,640
202011,482
202111,779
202212,065
202312,348
202412,642

2018 और 2019 के बीच आंकड़ों में बदलाव भी दिखाई देता है। इसलिए अलग-अलग वर्षों की तुलना करते समय अनुमान लगाने की पद्धति और आंकड़ों के आधार को समझना जरूरी है। इन संख्याओं को राज्य में कैंसर की वास्तविक व्यापकता का पूर्ण माप नहीं माना जाना चाहिए।

उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुंच, लंबी यात्रा, विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता और समय पर जांच जैसी चुनौतियां विशेष महत्व रखती हैं। ऐसे में राज्य के लिए यह आवश्यक है कि वह जिला स्तर पर स्क्रीनिंग, संदिग्ध मरीजों की जांच, उपचार तक पहुंच और मरीजों के रेफरल की स्थिति का नियमित मूल्यांकन करे।

कैंसर के प्रमुख कारण क्या हैं?

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, कैंसर कई प्रकार की बीमारियों का समूह है और इसके विकसित होने में आनुवंशिक, जैविक, पर्यावरणीय और जीवनशैली संबंधी कारक भूमिका निभा सकते हैं। प्रमुख जोखिम कारक निम्न हैं:

  • तंबाकू का सेवन: बीड़ी, सिगरेट, गुटखा, खैनी और अन्य तंबाकू उत्पाद मुंह, गले और फेफड़ों सहित कई कैंसरों का जोखिम बढ़ाते हैं।
  • शराब: शराब का सेवन कई प्रकार के कैंसर से जुड़ा है।
  • अस्वस्थ खानपान और मोटापा: असंतुलित भोजन, अधिक वजन और शारीरिक निष्क्रियता कुछ कैंसरों का जोखिम बढ़ा सकते हैं।
  • वायु प्रदूषण और हानिकारक पदार्थ: वायु प्रदूषण, पराबैंगनी विकिरण तथा एस्बेस्टस जैसे कुछ पदार्थ कैंसर के जोखिम से जुड़े हैं।
  • कुछ संक्रमण: ह्यूमन पैपिलोमावायरस (HPV) गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर का प्रमुख कारण है। हेपेटाइटिस बी और सी के संक्रमण से लिवर कैंसर का जोखिम बढ़ सकता है।
  • बढ़ती उम्र: उम्र बढ़ने के साथ कई कैंसरों का जोखिम बढ़ता है।

WHO के अनुसार, प्रमाण-आधारित रोकथाम उपाय अपनाकर दुनिया में लगभग 38 प्रतिशत कैंसरों को रोका जा सकता है। इसका अर्थ यह नहीं कि हर कैंसर को रोका जा सकता है, बल्कि यह कि जोखिम कारकों पर नियंत्रण से बीमारी का बोझ कम किया जा सकता है।

कैंसर के चेतावनी संकेत: किन लक्षणों को गंभीरता से लें?

कैंसर के शुरुआती लक्षण उसके प्रकार और शरीर में प्रभावित अंग के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं। भारत सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय के मानक उपचार दिशानिर्देशों में कई चेतावनी संकेतों का उल्लेख किया गया है।

1. मुंह में घाव या सफेद-लाल धब्बे: ऐसा घाव जो ठीक न हो, मुंह में गांठ, लगातार जलन या सफेद अथवा लाल धब्बा विशेष रूप से तंबाकू सेवन करने वालों में जांच की जरूरत बताता है।

2. शरीर में गांठ: स्तन या शरीर के किसी अन्य हिस्से में नई गांठ, मोटापन या लगातार बना रहने वाला बदलाव।

3. असामान्य रक्तस्राव: खांसी में खून, मल या पेशाब में खून, अथवा महिलाओं में असामान्य योनि रक्तस्राव।

4. लगातार खांसी या आवाज में बदलाव: ऐसी खांसी, गले में परेशानी या आवाज बैठना जो लंबे समय तक बना रहे।

5. निगलने में कठिनाई: भोजन निगलने में लगातार परेशानी या ऐसा दर्द जिसकी वजह स्पष्ट न हो।

6. मल-मूत्र की आदतों में बदलाव: लंबे समय तक कब्ज, दस्त, पेशाब में बदलाव या मल त्याग की आदतों में असामान्य परिवर्तन।

7. बिना स्पष्ट कारण वजन कम होना: अचानक वजन घटना, भूख में कमी या लगातार कमजोरी।

8. तिल या मस्से में बदलाव: आकार, रंग, किनारों या सतह में असामान्य बदलाव।

इनमें से किसी एक लक्षण का होना अपने आप कैंसर की पुष्टि नहीं करता। संक्रमण और अन्य गैर-कैंसर संबंधी बीमारियों में भी ऐसे लक्षण हो सकते हैं। लेकिन लक्षण बने रहें, बढ़ें या असामान्य रक्तस्राव जैसे गंभीर संकेत दिखाई दें, तो चिकित्सकीय जांच में देरी न करें।

भारत सरकार की गाइडलाइन: 30 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों की स्क्रीनिंग

भारत सरकार के राष्ट्रीय गैर-संचारी रोग रोकथाम एवं नियंत्रण कार्यक्रम (NP-NCD) के तहत आयुष्मान आरोग्य मंदिरों और अन्य निर्धारित सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों के माध्यम से सामान्य कैंसरों की शुरुआती पहचान के लिए स्क्रीनिंग की व्यवस्था की गई है।

इस कार्यक्रम में मुख्य रूप से तीन कैंसर शामिल हैं:

  • मुंह का कैंसर: मुंह की चिकित्सकीय जांच, विशेषकर तंबाकू सेवन करने वाले या अन्य जोखिम वाले व्यक्तियों में।
  • स्तन कैंसर: स्तनों की जांच और संदिग्ध बदलाव मिलने पर आगे की चिकित्सकीय जांच।
  • गर्भाशय ग्रीवा का कैंसर: पात्र महिलाओं की स्क्रीनिंग और असामान्य परिणाम आने पर आगे की जांच।

सरकारी कार्यक्रम के तहत 30 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों को सामान्य गैर-संचारी रोगों और इन प्रमुख कैंसरों की स्क्रीनिंग के लिए लक्षित किया जाता है। स्क्रीनिंग की उपयुक्त विधि और अंतराल संबंधित राष्ट्रीय दिशानिर्देशों तथा व्यक्ति की स्थिति के अनुसार तय होते हैं।

स्क्रीनिंग और निदान में अंतर समझना जरूरी है। स्क्रीनिंग से किसी संभावित समस्या का संकेत मिलता है; कैंसर की पुष्टि के लिए डॉक्टर अतिरिक्त जांच, और जरूरत पड़ने पर बायोप्सी जैसी प्रक्रिया की सलाह दे सकते हैं।

गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर से बचाव के लिए HPV टीकाकरण

केंद्र सरकार ने 2026 में पात्र 14 वर्षीय लड़कियों के लिए सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर HPV टीकाकरण अभियान शुरू किया। स्वास्थ्य मंत्रालय के 21 जुलाई 2026 के अपडेट के अनुसार, 15 जुलाई 2026 तक देश में 52,10,302 लड़कियों को HPV टीका लगाया जा चुका था।

HPV टीकाकरण गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर से बचाव का महत्वपूर्ण उपाय है। इसके साथ ही राष्ट्रीय दिशानिर्देशों के अनुसार स्क्रीनिंग और संदिग्ध लक्षणों की समय पर जांच जरूरी है। टीकाकरण कराने के बाद भी आवश्यक स्क्रीनिंग को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

WHO की सलाह: कैंसर का जोखिम कम करने के उपाय

विश्व स्वास्थ्य संगठन की कैंसर संबंधी तथ्य-पत्रिका के अनुसार, निम्न उपाय जोखिम कम करने में मदद कर सकते हैं:

  1. तंबाकू और तंबाकू उत्पादों का सेवन पूरी तरह छोड़ें।
  2. शराब से परहेज करें।
  3. फल, सब्जियां, साबुत अनाज और संतुलित भोजन को प्राथमिकता दें।
  4. नियमित शारीरिक गतिविधि करें और स्वस्थ वजन बनाए रखें।
  5. पात्रता और चिकित्सकीय सलाह के अनुसार HPV तथा हेपेटाइटिस बी का टीकाकरण कराएं।
  6. अत्यधिक पराबैंगनी विकिरण से बचें और धूप में उचित सुरक्षा अपनाएं।
  7. कार्यस्थल पर एस्बेस्टस और अन्य ज्ञात कैंसरकारी पदार्थों से सुरक्षा नियमों का पालन करें।
  8. असामान्य लक्षणों को नजरअंदाज न करें और डॉक्टर की सलाह के अनुसार जांच कराएं।

WHO के अनुसार, कई प्रकार के कैंसर की शुरुआती अवस्था में पहचान और उचित उपचार से इलाज की संभावना बेहतर हो सकती है।

पुरुषों और महिलाओं के लिए कैंसर से बचाव की विशेष सावधानियां

कैंसर से बचाव केवल बीमारी के लक्षण पहचानने तक सीमित नहीं है। तंबाकू से दूरी, स्वस्थ वजन, संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, टीकाकरण और उम्र व जोखिम के अनुसार जांच—ये सभी महत्वपूर्ण हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, कैंसर के कई जोखिम कारकों को नियंत्रित करके बीमारी की आशंका कम की जा सकती है, हालांकि हर कैंसर को रोकना संभव नहीं है।

पुरुषों के लिए जरूरी सावधानियां

1. तंबाकू, बीड़ी, सिगरेट और गुटखे से पूरी तरह दूरी रखें। पुरुषों में तंबाकू का सेवन मुंह, गले और फेफड़ों सहित कई कैंसरों का प्रमुख परिवर्तनीय जोखिम कारक है। तंबाकू छोड़ने के लिए जरूरत पड़ने पर चिकित्सकीय सहायता लें।

2. शराब से परहेज करें। शराब का सेवन मुंह, गले, भोजन नली, लिवर और कुछ अन्य कैंसरों के जोखिम से जुड़ा है।

3. मुंह में असामान्य बदलावों पर ध्यान दें। ऐसा घाव जो ठीक न हो, सफेद या लाल धब्बा, लगातार दर्द, मुंह खोलने में परेशानी या निगलने में कठिनाई होने पर डॉक्टर या दंत चिकित्सक से जांच कराएं।

4. पेशाब और मल में असामान्य बदलावों को नजरअंदाज न करें। पेशाब में खून, लगातार पेशाब संबंधी परेशानी, मल में खून या आंतों की आदतों में लंबे समय तक बदलाव होने पर चिकित्सकीय सलाह लें। ये लक्षण कई कारणों से हो सकते हैं और हर बार कैंसर का संकेत नहीं होते।

5. प्रोस्टेट कैंसर की जांच पर व्यक्तिगत सलाह लें। उम्र, पारिवारिक इतिहास और अन्य जोखिम कारकों के आधार पर डॉक्टर से PSA जांच के संभावित लाभ और सीमाओं पर चर्चा करें। इसे हर पुरुष के लिए अनिवार्य जांच न समझें।

6. वजन और शारीरिक गतिविधि पर ध्यान दें। लंबे समय तक निष्क्रिय रहने, बढ़े हुए वजन और असंतुलित भोजन से बचें। नियमित व्यायाम और संतुलित आहार अपनाएं।

महिलाओं के लिए जरूरी सावधानियां

1. स्तनों में होने वाले बदलाव पहचानें। नई गांठ, त्वचा में गड्ढा, निप्पल का अंदर खिंचना या असामान्य स्राव दिखाई देने पर चिकित्सकीय जांच कराएं। किसी भी बदलाव को केवल दर्द न होने के कारण नजरअंदाज न करें।

2. गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर से बचाव करें। पात्रता के अनुसार HPV टीकाकरण कराएं और राष्ट्रीय दिशानिर्देशों के अनुसार सर्वाइकल कैंसर की स्क्रीनिंग करवाएं। टीका लगने के बाद भी आवश्यक स्क्रीनिंग की जरूरत समाप्त नहीं होती।

3. असामान्य योनि रक्तस्राव को गंभीरता से लें। माहवारी के बीच, यौन संबंध के बाद या रजोनिवृत्ति के बाद रक्तस्राव होने पर डॉक्टर से परामर्श करें।

4. स्तन कैंसर की स्क्रीनिंग के बारे में जानकारी लें। उम्र, पारिवारिक इतिहास और व्यक्तिगत जोखिम के अनुसार डॉक्टर से पूछें कि क्लिनिकल जांच या मैमोग्राफी कब उपयुक्त होगी। जांच का सही अंतराल व्यक्ति की स्थिति और लागू दिशा-निर्देशों पर निर्भर करता है।

5. स्वस्थ वजन और संतुलित जीवनशैली अपनाएं। नियमित शारीरिक गतिविधि, पौष्टिक भोजन और शराब से परहेज कुछ कैंसरों के जोखिम को कम करने में मदद कर सकते हैं।

6. परिवार में कैंसर का इतिहास हो तो डॉक्टर को बताएं। कम उम्र में कैंसर का निदान या परिवार में कई करीबी सदस्यों को संबंधित कैंसर होने पर चिकित्सक से व्यक्तिगत जोखिम आकलन कराएं।

स्वस्थ जीवनशैली: कैंसर के जोखिम को कम करने की दिशा में रोजाना के कदम

स्वस्थ जीवनशैली केवल कैंसर ही नहीं, बल्कि हृदय रोग, मधुमेह और अन्य दीर्घकालिक बीमारियों से बचाव के लिए भी महत्वपूर्ण है। WHO की सलाह के अनुरूप निम्न आदतें अपनाई जा सकती हैं:

  • संतुलित भोजन: रोजाना विविध प्रकार की सब्जियां, फल, दालें, साबुत अनाज, मेवे और अन्य पौष्टिक खाद्य पदार्थ लें। अधिक नमक, अत्यधिक चीनी और बहुत अधिक प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों का सेवन सीमित करें।
  • प्रसंस्कृत मांस से बचाव: सॉसेज, बेकन और अन्य प्रसंस्कृत मांस से परहेज करें। लाल मांस का सेवन सीमित रखें।
  • नियमित व्यायाम: वयस्कों के लिए सप्ताह में कम से कम 150–300 मिनट मध्यम तीव्रता वाली शारीरिक गतिविधि या 75–150 मिनट तेज गतिविधि का लक्ष्य उपयोगी है। अपनी क्षमता और स्वास्थ्य के अनुसार शुरुआत करें।
  • स्वस्थ वजन: वजन बढ़ने से रोकने के लिए नियमित गतिविधि और संतुलित भोजन अपनाएं।
  • पर्याप्त नींद और तनाव प्रबंधन: नियमित नींद, आराम, योग और ध्यान समग्र स्वास्थ्य के लिए उपयोगी हैं। हालांकि, इन्हें कैंसर का प्रमाणित इलाज या पूर्ण बचाव नहीं माना जाना चाहिए।
  • टीकाकरण: पात्र व्यक्तियों में HPV और हेपेटाइटिस बी का टीकाकरण संबंधित दिशा-निर्देशों के अनुसार कराएं।
  • हानिकारक संपर्क से बचाव: धूप में उचित सुरक्षा अपनाएं और कार्यस्थल पर कैंसरकारी रसायनों, धूल तथा अन्य हानिकारक पदार्थों से बचाव के नियमों का पालन करें।
  • नियमित स्वास्थ्य जांच: उम्र, लक्षण, पारिवारिक इतिहास और व्यक्तिगत जोखिम के अनुसार डॉक्टर से उपयुक्त स्क्रीनिंग के बारे में पूछें।

कैंसर की जांच कब करानी चाहिए?

किसी भी असामान्य लक्षण के लगातार बने रहने पर जांच कराना जरूरी है। इसके अलावा, बिना लक्षण वाले लोगों को भी उम्र और जोखिम के अनुसार निर्धारित स्क्रीनिंग की जरूरत हो सकती है। भारत सरकार के कार्यक्रम में 30 वर्ष से अधिक उम्र के पात्र लोगों के लिए मुंह, स्तन और गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर की शुरुआती पहचान पर विशेष ध्यान दिया जाता है।

ध्यान रखें कि हर व्यक्ति के लिए सभी प्रकार के कैंसर की जांच कराना आवश्यक या उपयोगी नहीं होता। उदाहरण के लिए, पूरे शरीर की स्कैनिंग या बिना चिकित्सकीय सलाह के ट्यूमर मार्कर जांच कराना सामान्य स्क्रीनिंग का विकल्प नहीं है। उचित जांच का चयन डॉक्टर की सलाह और प्रमाण-आधारित दिशा-निर्देशों के अनुसार होना चाहिए।

मुख्य संदेश: स्वस्थ जीवनशैली अपनाएं, तंबाकू और शराब से दूर रहें, टीकाकरण व उपयुक्त स्क्रीनिंग को प्राथमिकता दें और शरीर में असामान्य बदलावों पर समय रहते चिकित्सकीय सलाह लें। जागरूकता, रोकथाम और समय पर उपचार कैंसर के बोझ को कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।

कैंसर उपचार के लिए सरकारी सुविधाएं और सहायता

स्वास्थ्य मंत्रालय ने 2025 में बताया था कि देश में जिला NCD क्लीनिक, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में NCD क्लीनिक, राज्य कैंसर संस्थान और तृतीयक कैंसर देखभाल केंद्रों के माध्यम से कैंसर सेवाओं को मजबूत किया जा रहा है। आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (AB-PMJAY) के पात्र लाभार्थियों को निर्धारित नियमों और पैकेज के अनुसार अस्पताल में भर्ती तथा कैंसर उपचार के लिए वित्तीय सहायता भी उपलब्ध है।

उत्तराखंड में मरीज अपने नजदीकी आयुष्मान आरोग्य मंदिर, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र या जिला अस्पताल से स्क्रीनिंग और आगे की जांच के बारे में जानकारी ले सकते हैं। संदिग्ध परिणाम आने पर समय पर विशेषज्ञ केंद्र में रेफरल और उपचार सुनिश्चित करना जरूरी है।

उत्तराखंड सरकार के सामने जनहित के सवाल

  • प्रत्येक जिले में मुंह, स्तन और गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर की स्क्रीनिंग कितने लोगों की हुई?
  • स्क्रीनिंग में संदिग्ध पाए गए कितने मरीजों की पुष्टि संबंधी जांच पूरी हुई?
  • कैंसर डे-केयर इकाइयों में कौन-कौन सी सेवाएं उपलब्ध हैं और कितने मरीजों को लाभ मिला?
  • पर्वतीय क्षेत्रों के मरीजों को विशेषज्ञ डॉक्टरों और उपचार केंद्रों तक पहुंचाने के लिए क्या व्यवस्था है?
  • राज्य में कैंसर के मामलों, उपचार, मृत्यु दर और स्क्रीनिंग की प्रगति की जिला-वार रिपोर्ट सार्वजनिक कब होगी?

जागरूकता के साथ समय पर जांच भी जरूरी

भारत और उत्तराखंड में कैंसर के अनुमानित मामलों में वृद्धि सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर विषय है। इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं, जिनमें बेहतर पहचान, आबादी की उम्र बढ़ना और जीवनशैली से जुड़े जोखिम शामिल हैं। इसलिए किसी एक खाद्य पदार्थ या कारण को कैंसर के बढ़ने का जिम्मेदार ठहराना वैज्ञानिक रूप से उचित नहीं होगा।

सरकारी स्क्रीनिंग कार्यक्रमों का प्रभावी क्रियान्वयन, तंबाकू नियंत्रण, टीकाकरण, शुरुआती लक्षणों की पहचान, समय पर उपचार और जिला स्तर पर पारदर्शी आंकड़े कैंसर से होने वाली मौतों और बीमारी के बोझ को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

अपील: अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहें, शरीर में असामान्य बदलावों को नजरअंदाज न करें और उम्र तथा जोखिम के अनुसार चिकित्सकीय सलाह लेकर स्क्रीनिंग कराएं। कैंसर की आशंका होने पर घबराने के बजाय समय पर जांच और प्रमाण-आधारित उपचार को प्राथमिकता दें।

स्रोत: भारत सरकार का स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, लोकसभा में प्रस्तुत ICMR-NCRP आंकड़े, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन और विश्व स्वास्थ्य संगठन।

यह जन-जागरूकता रिपोर्ट है, व्यक्तिगत चिकित्सकीय निदान का विकल्प नहीं

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