एम्स ऋषिकेश भर्ती में फिर नया फर्जीवाड़ा उजागर: वायरमैन पद के बायोमेट्रिक सत्यापन में प्रतिरूपण का मामला; एक गिरफ्तार, दूसरा फरार, एम्स में फर्जी भर्ती मामलों की भरमार

एम्स ऋषिकेश भर्ती में फिर नया फर्जीवाड़ा उजागर: वायरमैन पद के बायोमेट्रिक सत्यापन में प्रतिरूपण का मामला; एक गिरफ्तार, दूसरा फरार, एम्स में फर्जी भर्ती मामलों की भरमार

लगातार फर्जी भर्ती मामलों की भरमार, पहले नर्सिंग ऑफिसर भर्ती में मिले थे 850 पद पर 800 राजस्थान निवासी, नाम लिखना तक नहीं जान थे अधिकारी लेकिन जांच नहीं हुई, इलाज की गुणवत्ता पर लगातार सवाल ।

ऋषिकेश, उत्तराखंड | 19 अक्टूबर 2026

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) ऋषिकेश में कॉमन रिक्रूटमेंट एग्जामिनेशन (CRE-3) प्रक्रिया के दौरान एक बड़ा भर्ती फर्जीवाड़ा सामने आया है। वायरमैन पद के लिए बायोमेट्रिक सत्यापन में फर्जी पहचान और दस्तावेजों के इस्तेमाल का मामला उजागर हुआ। पुलिस ने एक आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि पद पर जॉइन करने वाला व्यक्ति फरार है।

नया फर्जीवाड़ा कैसे पकड़ा गया

17 अक्टूबर 2026 को एम्स ऋषिकेश में अभ्यर्थियों के बायोमेट्रिक सत्यापन के दौरान वायरमैन पद के चयनित अभ्यर्थी विकास कुमार मीणा की पहचान पर संदेह हुआ। मूल अभिलेखों और पहचान पत्रों का मिलान करने पर पता चला कि परीक्षा में शामिल व्यक्ति और एम्स में कार्यभार ग्रहण करने वाले व्यक्ति की तस्वीरें अलग-अलग हैं, जबकि दस्तावेजों में दर्ज विवरण समान थे।

एम्स के सहायक प्रशासनिक अधिकारी विक्रम सिंह ने कोतवाली ऋषिकesh में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, देहरादून के निर्देश पर गठित टीम ने जांच के बाद 18 अक्टूबर 2026 को 40 वर्षीय अशोक कुमार मीणा (पुत्र स्वर्गीय रामकरण मीणा), निवासी जटाली ढाणी, काली पहाड़ी, जिला दौसा, राजस्थान को गिरफ्तार किया। वह बायोमेट्रिक सत्यापन के लिए पहुंचा था। उसे कोर्ट में पेश कर जिला कारागार देहरादून भेज दिया गया।

दूसरा आरोपी विकास कुमार मीणा (पुत्र धनफूल मीणा), जो उसी गांव दौसा, राजस्थान का रहने वाला है और एम्स में जॉइन कर चुका था, फरार है। पुलिस उसकी तलाश में जुटी है। जांच में प्रतिरूपण, फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल और परीक्षा, नियुक्ति व सत्यापन प्रक्रिया में अन्य लोगों की संभावित भूमिका की पड़ताल की जा रही है।

एम्स ऋषिकेश में अब तक के जॉब संबंधित आरोप, पहले नर्सिंग ऑफिसर भर्ती में मिले थे 850 पद पर 800 राजस्थान निवासी, लेकिन जांच नहीं हुई।

यह कोई अकेला मामला नहीं है। पिछले कुछ वर्षों में कई भर्ती संबंधी फर्जीवाड़े और अनियमितताएं सामने आई हैं:

  • सितंबर 2026 – एम्स किच्छा सैटेलाइट सेंटर के नाम पर फर्जी नियुक्ति रैकेट: एम्स ऋषिकेश सुरक्षा विभाग और प्रशासन ने खुफिया सूचना के आधार पर बैराज रोड पर स्टिंग ऑपरेशन किया। पुलिस ने पांच लोगों को गिरफ्तार किया, जिनमें भाई-बहन और एक आउटसोर्स कर्मचारी शामिल हैं। आरोप है कि उन्होंने निर्माणाधीन एम्स किच्छा (ऊधम सिंह नगर) में नर्सिंग ऑफिसर और मल्टी-टास्किंग स्टाफ जैसे पदों का वादा कर अभ्यर्थियों से पैसे वसूले। दो फर्जी नियुक्ति पत्र और 2 लाख रुपये नकद बरामद हुए। आउटसोर्स एजेंसी (राजदीप इंटरप्राइजेज) के स्थानीय मैनेजर की भूमिका संदिग्ध पाई गई। पुलिस ने एजेंसी के कार्यालय की तलाशी ली और डिजिटल उपकरण जब्त किए। धोखाधड़ी और जालसाजी संबंधी BNS धाराओं में मुकदमा दर्ज हुआ।
  • दिसंबर 2025 – एम्स कर्मचारी पर नौकरी के नाम पर पैसे लेने का आरोप: ऋषिकेश निवासी सागर चौधरी की शिकायत पर जूनियर एडमिनिस्ट्रेटिव असिस्टेंट सिद्धार्थ शर्मा के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया। शिकायतकर्ता का आरोप है कि शर्मा ने इंट्राम्यूरल रिसर्च प्रोजेक्ट के सिलसिले में एम्स में नौकरी दिलाने का वादा कर 5.59 लाख रुपये लिए। शर्मा ने 2 लाख रुपये लौटाए लेकिन नौकरी नहीं दी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर मामला दर्ज हुआ। एम्स ने कहा कि शर्मा के खिलाफ पहले के आरोपों की जांच पूरी हो चुकी है और रिपोर्ट सक्षम अधिकारी को सौंपी जा चुकी है।
  • सितंबर 2025 – पूर्व निदेशक समेत अन्य के खिलाफ सीबीआई मामला: सीबीआई ने एम्स ऋषिकेश के पूर्व निदेशक (पद्मश्री) रवि कांत, राजेश पासरीचा (तत्कालीन एम्स भोपाल) और पूर्व स्टोरकीपर-कम-क्लर्क रूप सिंह के खिलाफ एफआईआर दर्ज की। आरोपों में निजी मेडिकल कंपनी को अनुचित फायदा पहुंचाना, 2019-20 में लगभग 8.08 करोड़ रुपये के भुगतान में अनियमितता और कार्डियोलॉजी विभाग/कोरोनरी केयर यूनिट से जुड़े टेंडर फाइल छुपाना शामिल हैं। इससे पहले 2022 में भी कैम्पस में केमिस्ट शॉप और अन्य खरीद प्रक्रियाओं में भ्रष्टाचार के मामलों में सीबीआई जांच हुई थी।

पहले भी भर्ती, टेंडर और प्रशासनिक अनियमितताओं को लेकर सीबीआई छापे और शिकायतें सामने आ चुकी हैं। एम्स नई दिल्ली समय-समय पर भर्ती/प्रवेश संबंधी फर्जीवाड़े के खिलाफ चेतावनी जारी करता रहा है और स्पष्ट करता है कि आधिकारिक प्रक्रिया केवल अधिकृत वेबसाइटों के माध्यम से होती है तथा कोई भी अतिरिक्त पैसे की मांग नहीं कर सकता।

गुणवत्ता और मरीज देखभाल संबंधी शिकायतें

भर्ती मामलों के अलावा एम्स ऋषिकेश को मरीज देखभाल की गुणवत्ता पर भी सवालों का सामना करना पड़ा है:

  • 2014 के एक पुराने मामले में उत्तराखंड राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने अगस्त 2026 में जिला आयोग के आदेश को बरकरार रखते हुए एम्स ऋषिकेश को 60,000 रुपये (50,000 रुपये मुआवजा + 10,000 रुपये मुकदमेबाजी खर्च) देने का निर्देश दिया। अस्पताल के डिस्चार्ज सारांश में मरीज को बार-बार एचआईवी पॉजिटिव दर्ज किया गया था, जबकि कोई सहायक नैदानिक साक्ष्य नहीं था। बाद में देहरादून के अन्य अस्पतालों में टेस्ट में वह एचआईवी नेगेटिव पाया गया। आयोग ने इसे चिकित्सकीय लापरवाही और सेवा में कमी माना तथा इससे हुई सामाजिक कलंक और मानसिक पीड़ा का जिक्र किया। एम्स की अपील खारिज कर दी गई।

पिछले वर्षों में प्रशासनिक अनियमितताओं, उपकरण खरीद और संस्थागत प्रबंधन को लेकर भी सक्रियतावादियों और आरटीआई आवेदकों द्वारा कई सवाल उठाए गए हैं।

वर्तमान स्थिति और आधिकारिक रुख

वायरमैन पद वाले ताजा मामले की पुलिस जांच जारी है। अधिकारी परीक्षा से लेकर जॉइनिंग और बायोमेट्रिक सत्यापन तक की पूरी श्रृंखला की जांच कर रहे हैं ताकि फर्जीवाड़े की सीमा और संभावित नेटवर्क का पता लगाया जा सके। एम्स ऋषिकेश प्रशासन ने शिकायत दर्ज कराकर सहयोग किया है।

भर्ती घोटालों, नकदी-के-बदले-नौकरी के आरोपों, खरीद में सीबीआई जांच और गुणवत्ता संबंधी निष्कर्षों ने संस्थान की भर्ती और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में व्यवस्थागत जांच की कमी पर सवाल खड़े किए हैं। नौकरी चाहने वालों को सलाह दी जाती है कि वे केवल आधिकारिक एम्स अधिसूचनाओं और वेबसाइटों पर भरोसा करें तथा पैसे की मांग या “गारंटीड चयन” के अनौपचारिक ऑफर की सूचना पुलिस को दें।

जांच आगे बढ़ने और फरार आरोपी विकास कुमार मीणा की गिरफ्तारी के साथ और अपडेट आने की उम्मीद है।

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