5 मई 2026, नई दिल्ली — 4 मई 2026 को मतगणना के बाद पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, असम और पुडुचेरी के चुनाव परिणाम घोषित हो गए। इन पांचों राज्यों/केंद्र शासित प्रदेश में कुल 824 सीटों पर मतदान हुआ था। इन नतीजों ने भारतीय राजनीति की दिशा बदल दी है। भाजपा ने पश्चिम बंगाल में ऐतिहासिक जीत दर्ज की, तमिलनाडु में अभिनेता विजय की टीवीके ने द्रविड़ दलों के द्वंद्व को तोड़ा, केरल में कांग्रेस नीत यूडीएफ ने वापसी की, असम में भाजपा गठबंधन ने सत्ता बरकरार रखी और पुडुचेरी में एनडीए ने मजबूत प्रदर्शन किया।
यह रिपोर्ट प्रत्येक राज्य के विस्तृत परिणामों, वोट प्रतिशत, मतदान पैटर्न, प्रमुख मुद्दों, जीत-हार के कारणों और आगे की राजनीति पर आधारित है।
1. पश्चिम बंगाल: भाजपा की ऐतिहासिक ‘परिवर्तन’ — ममता का 15 साल का राज खत्म
सीटें: 294 (293 पर नतीजे घोषित, फलता में पुनर्मतदान)
बहुमत: 148 (293 सीटों पर 147)
- भाजपा: 207 सीटें (45.84% वोट शेयर)
- टीएमसी: 80 सीटें (40.80% वोट शेयर)
- कांग्रेस: 2, सीपीआई(एम): 1, अन्य: 3-5
विस्तार: भाजपा ने 2021 के 77 सीटों से भारी उछाल लिया, जबकि टीएमसी का 215 से भारी पतन हुआ। वोट शेयर में भाजपा ने 7.69% की बढ़ोतरी की। कुल वोट: भाजपा को लगभग 2.92 करोड़, टीएमसी को 2.60 करोड़।
मतदान और मुद्दे:
मतदान दो चरणों (23 और 29 अप्रैल) में हुआ। कुल मतदान प्रतिशत लगभग 78-80% रहा। प्रमुख मुद्दे — संदेशखाली हिंसा, टीएमसी में भ्रष्टाचार (घोटालों का आरोप), सुशासन की मांग, बेरोजगारी, हिंदू-मुस्लिम ध्रुवीकरण, CAA-NRC, और ममता बनर्जी की तानाशाही शैली। ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं और अल्पसंख्यक मतदाताओं में टूट, शहरी-नगरीय क्षेत्रों में युवा वोट भाजपा की ओर।
क्यों जीती भाजपा?
- एंटी-इनकंबेंसी चरम पर।
- सुवेंदु अधिकारी जैसे चेहरे की रणनीति।
- पीएम मोदी-अमित शाह की सक्रियता।
- हिंदू वोट का एकीकरण।
- टीएमसी कैबिनेट मंत्रियों की हार।
आगे क्या?
भाजपा सरकार बनाने जा रही है। मुख्यमंत्री पद के दावेदार: सुवेंदु अधिकारी या अन्य स्थानीय नेता। केंद्र से विशेष पैकेज की उम्मीद। टीएमसी में कलह, ममता बनर्जी का भविष्य अनिश्चित। विपक्ष में कांग्रेस-सीपीआई(एम) की भूमिका। 2029 लोकसभा के लिए बड़ा संदेश।
2. तमिलनाडु: विजय का जादू — द्रविड़ द्वंद्व टूटा
सीटें: 234
बहुमत: 118
- टीवीके (तamilaga Vettri Kazhagam): 108 सीटें (34.92% वोट)
- डीएमके+: 73 सीटें (31.39%) (डीएमके 59)
- एआईएडीएमके+: 53 सीटें (27.22%)
- अन्य: NTK आदि 0-4%
विस्तार: अभिनेता सी. जोसेफ विजय की पहली चुनावी परीक्षा में टीवीके सबसे बड़ी पार्टी बनी, लेकिन बहुमत से 10 सीटें कम। विजय ने पेराम्बुर और तिरुचिरापल्ली ईस्ट दोनों सीटों पर भारी अंतर से जीत हासिल की। वोट शेयर में टीवीके ने 1.7 करोड़+ वोट पाए।
मुद्दे:
- हिंदुत्व vs द्रविड़ मॉडल
- हिंदी थोपने का आरोप
- बेरोजगारी, किसान संकट
- डीएमके में भ्रष्टाचार (स्टालिन सरकार)
- युवा और सिनेमा प्रेमी वोट का झुकाव टीवीके की ओर।
मतदान: लगभग 72-75%। टीवीके ने सभी 234 सीटों पर स्वतंत्र लड़ाई लड़ी।
आगे क्या?
हंग असेंबली की स्थिति। टीवीके सरकार बनाने के लिए कांग्रेस या अन्य से बातचीत। स्टालिन ने इस्तीफा दे दिया। एआईएडीएमके में आंतरिक कलह बढ़ेगी। विजय को मुख्यमंत्री पद की दावेदारी। तमिलनाडु की राजनीति में नया अध्याय — ‘एमजीआर 2.0’।)
3. केरल: यूडीएफ की वापसी — पिनारायी का दशक खत्म
सीटें: 140
बहुमत: 71
- यूडीएफ (कांग्रेस+): ~97-102 सीटें (44.19% वोट)
- एलडीएफ (सीपीआई(एम)+): 35 सीटें (32.82%)
- एनडीए: 3 सीटें (12.76%)
विस्तार: कांग्रेस के नेतृत्व में यूडीएफ ने 10 साल बाद सत्ता हासिल की। पिनारायी विजयन ने अपनी सीट जीती लेकिन सरकार गंवाई। कांग्रेस को 63+ सीटें।
मुद्दे:
- एंटी-इनकंबेंसी (एलडीएफ की नीतियां)
- बेरोजगारी, आप्रवासी मुद्दे
- सांप्रदायिक ध्रुवीकरण
- महिला सुरक्षा, शिक्षा-स्वास्थ्य।
आगे क्या?
कांग्रेस नेता (संभवतः वी.डी. सतीसन) मुख्यमंत्री। एलडीएफ विपक्ष में मजबूत। भाजपा का वोट बढ़ा लेकिन सीटें कम।
4. असम: भाजपा गठबंधन की तीसरी जीत
सीटें: 126
बहुमत: 64
- एनडीए (भाजपा+): 92 सीटें (44.29% वोट)
- कांग्रेस+: 21 सीटें
- अन्य: AIUDF 2 आदि।
विस्तार: हिमंता बिस्वा सरमा के नेतृत्व में भाजपा ने सत्ता बरकरार रखी। कांग्रेस का प्रदर्शन खराब।
मुद्दे: CAA, अवैध घुसपैठ, बाढ़, चाय बागान मजदूर, पूर्वोत्तर विकास।
आगे क्या?
हिमंता सरमा फिर मुख्यमंत्री। स्थिर सरकार।
5. पुडुचेरी: एनडीए की जीत
सीटें: 30
बहुमत: 16
- एनडीए: 18 सीटें (38.70%)
- कांग्रेस+: 6
- अन्य: 6
विस्तार: एनआर कांग्रेस-भाजपा गठबंधन ने सत्ता बरकरार रखी।
आगे क्या?
राष्ट्रीय प्रभाव और आगे की राजनीति
- भाजपा का विस्तार: बंगाल जीत से 2029 लोकसभा मजबूत।
- विपक्षी एकता को झटका।
- क्षेत्रीय दलों का पतन/उभार।
- मुद्दे: सुशासन, विकास, राष्ट्रवाद vs क्षेत्रीय पहचान।
ये परिणाम 2027-29 के चुनावी चक्र को आकार देंगे। राजनीतिक विश्लेषक इसे ‘परिवर्तन का वर्ष’ बता रहे हैं।
नोट: स्थिति बदल सकती है। नवीनतम अपडेट के लिए ईसीआई वेबसाइट देखें।

