ग्वालदम कृषि विज्ञान केंद्र में केंद्रीय विद्यालय के बच्चों ने सीखे आधुनिक और प्राकृतिक खेती के गुर

ग्वालदम कृषि विज्ञान केंद्र में केंद्रीय विद्यालय के बच्चों ने सीखे आधुनिक और प्राकृतिक खेती के गुर

ग्वालदम (चमोली)। गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (Pantnagar) के अंतर्गत संचालित चमोली जिले के ग्वालदम स्थित कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) में स्कूली बच्चों के लिए एक व्यावहारिक व ज्ञानवर्धक कृषि जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस विशेष अध्ययन भ्रमण और प्रशिक्षण कार्यक्रम में केन्द्रीय विद्यालय एसएसबी (SSB) ग्वालदम के कक्षा 6, 7 और 8वीं के कुल 115 छात्र-छात्राओं ने प्रतिभाग किया।

कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य युवा पीढ़ी को पारंपरिक, आधुनिक और प्राकृतिक खेती (Natural Farming) के प्रति जागरूक करना और उन्हें कृषि विज्ञान की बारीकियों से रूबरू कराना था।

🛡️ मौसमी बीमारियों, कीट प्रबंधन और कृषि वानिकी की सीख

कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी अधिकारी डॉ. एस. एस. सिंह ने बच्चों को मौसमी फसलों में लगने वाले विभिन्न प्रकार के हानिकारक कीटों और रोगों के बारे में विस्तार से समझाया। उन्होंने छात्रों को बताया कि किस प्रकार सही समय पर रोगों की पहचान कर और वैज्ञानिक उपचार पद्धतियों को अपनाकर फसलों को नष्ट होने से बचाया जा सकता है।

इसके बाद, केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. शिवदयाल ने उपस्थित छात्र-छात्राओं को कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) के उद्देश्यों, कार्यप्रणाली और ग्रामीण विकास में इसकी भूमिका के बारे में जानकारी दी। उन्होंने पहाड़ी क्षेत्रों की आर्थिकी और पर्यावरण संतुलन के लिए कृषि वानिकी (Agroforestry) के महत्व को रेखांकित किया और बच्चों को पेड़ लगाने तथा उनके संरक्षण के लिए प्रेरित किया।

🏠 संरक्षित खेती, ग्रीनहाउस प्रभाव और मधुमक्खी पालन के तकनीकी गुर

तकनीकी सत्र में वैज्ञानिक डॉ. अभिषेक बहुगुणा ने संरक्षित खेती (Protected Cultivation) के अंतर्गत आधुनिक कृषि तकनीकों की जानकारी साझा की। उन्होंने बच्चों को लाइव डिमॉन्स्ट्रेशन के माध्यम से निम्नलिखित मुख्य बिंदुओं पर शिक्षित किया:

  • पॉलीहाउस और नेटहाउस प्रबंधन: ऑफ-सीजन (बेमौसम) में सब्जियों और उच्च मूल्य वाले फूलों की सफल खेती कैसे की जाती है।
  • ग्रीनहाउस गैसों से सुरक्षा: ग्रीनहाउस में उत्पन्न होने वाली गैसों के हानिकारक प्रभावों से फसलों को सुरक्षित रखने की वैज्ञानिक विधियां।
  • तापमान नियंत्रण: बदलती जलवायु के बीच पॉलीहाउस के भीतर के तापमान और आर्द्रता (Humidity) को नियंत्रित करने के तकनीकी तरीके।
  • मधुमक्खी पालन (Apiculture): मधुमक्खी पालन किस प्रकार सब्जी उत्पादकों के लिए दोहरा लाभ (बेहतर परागण और अतिरिक्त आय) पहुंचाकर लाभदायक साबित हो सकता है।

🥛 पशुपालन, मुर्गीपालन और प्राकृतिक खेती (Natural Farming) पर विशेष सत्र

पशुधन प्रबंधन पर चर्चा करते हुए वैज्ञानिक डॉ. अरुण सैनी ने उन्नत पशुपालन (Animal Husbandry) और मुर्गीपालन (Poultry Farming) के आधुनिक तरीकों की जानकारी दी। उन्होंने पहाड़ी क्षेत्रों में स्वरोजगार के रूप में इन व्यवसायों को अपनाने की संभावनाओं पर प्रकाश डाला।

आज के समय की सबसे महत्वपूर्ण आवश्यकता, यानी प्राकृतिक खेती (Natural Farming) पर बात करते हुए वैज्ञानिक डॉ. डी. सी. काला ने बच्चों को रसायनों से मुक्त कृषि का पाठ पढ़ाया। उन्होंने बच्चों को केंद्र की लैब और खेतों में ले जाकर निम्नलिखित जैविक खाद व कीटनाशक बनाने की व्यावहारिक विधि सिखाई:

  • जीवामृत और बीजामृत (मिट्टी की उर्वरा शक्ति और बीज उपचार के लिए)
  • घनजीवामृत और दशपर्णी अर्क (पौधों को पोषण देने और कीटों/बीमारियों से बचाने की प्राकृतिक एवं जैविक विधि)

🧪 बच्चों ने खुद परखी मृदा स्वास्थ्य की अहमियत

भ्रमण के दौरान छात्र-छात्राओं में भारी उत्साह देखा गया। उत्सुक बच्चों ने वैज्ञानिकों से सीधे संवाद करते हुए प्राकृतिक खेती, मृदा स्वास्थ्य (Soil Health), मृदा उपचार (Soil Treatment) और सॉयल टेस्टिंग (मृदा जांच) की प्रक्रियाओं के बारे में कई सवाल पूछे और प्रयोगात्मक रूप से जानकारी हासिल की।

इस शैक्षणिक और व्यावहारिक कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय विद्यालय एसएसबी ग्वालदम के शिक्षक और शिक्षिकाएं भी मौजूद रहे, जिनमें श्री कमलेश डालाकोटी, श्रीमती सोनम शर्मा, श्रीमती खुशबू रानी और श्री सुनील कुमार सिंह शामिल थे। स्कूल प्रबंधन और शिक्षकों ने कृषि विज्ञान केंद्र के इस अनूठे प्रयास की सराहना की और कहा कि क्लासरूम से बाहर आकर इस प्रकार का व्यावहारिक ज्ञान बच्चों के मानसिक और वैज्ञानिक विकास के लिए बेहद जरूरी है।

Comments

No comments yet. Why don’t you start the discussion?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *