🏛️ 1. राष्ट्रीय नीतियां, बजट और बड़े आयोजन
1. राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस 2026: ‘विज्ञान-टेक 2026’ का भव्य आयोजन
11 मई 2026 को देश भर में राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस (National Technology Day) अत्यंत उत्साह के साथ मनाया गया। इस अवसर पर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) ने ‘BRIC-National Institute of Immunology’ (NII) परिसर में ‘विज्ञान-टेक 2026’ नामक एक मेगा शो का आयोजन किया। इस भव्य कार्यक्रम में देश के 14 प्रमुख वैज्ञानिक मंत्रालयों और विभागों ने एक साथ आकर अपने अग्रणी स्वदेशी डीप-टेक (Deep-Tech) नवाचारों का जीवंत प्रदर्शन किया। इसका मुख्य उद्देश्य घरेलू स्तर पर विकसित तकनीकों के व्यावसायीकरण को बढ़ावा देना था।
2. अनुसंधान एवं नवाचार के लिए ₹1 लाख करोड़ का RDI फंड क्रियाशील
भारत सरकार ने अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन (ANRF) के तत्वावधान में ₹1 लाख करोड़ का एक ऐतिहासिक रिसर्च, डेवलपमेंट एंड इनोवेशन (RDI) फंड स्थापित किया है। यह फंड पूरी तरह से ‘हाई-रिस्क, हाई-इम्पैक्ट’ वाले डीप-टेक प्रोजेक्ट्स के लिए समर्पित किया गया है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह फंड केवल सरकारी स्तर पर काम नहीं करेगा, बल्कि निजी क्षेत्र (Private Sector) के साथ 50:50 की साझेदारी में काम करेगा ताकि कॉरपोरेट जगत का पैसा भी कोर रिसर्च में लग सके।
3. महिलाओं में विज्ञान: राष्ट्रीय विज्ञान दिवस 2026 की विशेष थीम
इस वर्ष राष्ट्रीय विज्ञान दिवस (28 फरवरी) को एक क्रांतिकारी दृष्टिकोण के साथ मनाया गया, जिसकी आधिकारिक थीम “Women in Science: Catalysing Viksit Bharat” (विज्ञान में महिलाएं: विकसित भारत को उत्प्रेरित करना) रखी गई थी। इस नीति के तहत देश भर की महिला वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और टेक-इंटरप्रेन्योर्स को मुख्यधारा में लाने के लिए कई विशेष फेलोशिप और वित्तीय योजनाओं की घोषणा की गई, ताकि विज्ञान के माध्यम से 2047 के विकसित भारत के लक्ष्य को पाया जा सके।
4. भारत की ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स (GII) में ऐतिहासिक सुधार
ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स (GII) की नवीनतम रैंकिंग के अनुसार, भारत विश्व के शीर्ष नवोन्मेषी देशों की सूची में 38वें स्थान पर पहुंच गया है। पिछले कुछ वर्षों में देश के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में R&D पर होने वाले खर्च में लगातार बढ़ोतरी और पेटेंट फाइलिंग की प्रक्रिया के आसान होने के कारण भारत की रैंकिंग में यह सकारात्मक और बड़ा उछाल देखने को मिला है।
5. तमिलनाडु डीप टेक स्टार्टअप पॉलिसी 2025-26 धरातल पर उतरी
राज्य स्तर पर नवोन्मेष को बढ़ावा देने के लिए तमिलनाडु सरकार ने अपनी समर्पित ‘डीप टेक स्टार्टअप नीति’ को पूरी तरह से लागू कर दिया है। इस नीति का उद्देश्य चेन्नई और कोयंबटूर को देश का अग्रणी डीप-टेक हब बनाना है। इसके तहत एरोस्पेस, रोबोटिक्स और एडवांस्ड मैटेरियल्स पर काम करने वाले शुरुआती दौर के स्टार्टअप्स को विशेष सब्सिडी और अत्याधुनिक लैब्स की पहुंच दी जा रही है।
🚀 2. अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी और डिफेंस आरएंडडी (Space & Defense Tech)
6. ISRO का Gaganyaan मिशन: दूसरा Integrated Air Drop Test सफल
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने अपने महत्वाकांक्षी मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम ‘गगनयान’ की दिशा में एक और बड़ी कामयाबी हासिल की है। इसरो ने क्रू मॉड्यूल (Crew Module) का दूसरा इंटीग्रेटेड एयर ड्रॉप टेस्ट (IADT) सफलतापूर्वक पूरा किया। इस परीक्षण में मॉड्यूल को अत्यधिक ऊंचाई से गिराकर उसके पैराशूट सिस्टम और सुरक्षित लैंडिंग की प्रणालियों को परखा गया। इस सफलता के बाद, वर्ष 2026 के अंत या 2027 की शुरुआत में पहले अनक्रूड (बिना अंतरिक्ष यात्री वाले) मिशन को अंतरिक्ष में भेजने का रास्ता साफ हो गया है।
7. DRDO का स्क्रैमजेट कंबस्टर टेस्ट: 1200 सेकंड से अधिक की ऐतिहासिक सफलता
रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) की प्रमुख प्रयोगशाला DRDL हैदराबाद ने एक युगांतरकारी परीक्षण को अंजाम दिया है। हाइपरसोनिक मिसाइलों (Hypersonic Missiles) के विकास के लिए बेहद जरूरी ‘एक्टिवली कूल्ड फुल स्केल स्क्रैमजेट कंबस्टर’ (Actively Cooled Full Scale Scramjet Combustor) का 1200 सेकंड से अधिक लंबा ग्राउंड हॉट टेस्ट सफलतापूर्वक पूरा किया गया। इतनी लंबी अवधि तक स्क्रैमजेट इंजन का सफल संचालन करने के बाद भारत दुनिया के उन चुनिंदा देशों में शामिल हो गया है जिनके पास लंबी दूरी की हाइपरसोनिक क्रूज़ मिसाइल बनाने की क्षमता है।
8. भारत का पहला स्वदेशी स्पेस सेमीकंडक्टर चिप ‘IRIS’ तैयार
IIT मद्रास और ISRO के संयुक्त प्रयासों से भारत का पहला स्वदेशी स्पेस-ग्रेड माइक्रोप्रोसेसर चिप विकसित कर लिया गया है, जिसे IRIS (RISC-V Controller for Space Applications) नाम दिया गया है। अब तक भारत को अपने उपग्रहों और रॉकेटों के कंट्रोल सिस्टम के लिए विदेशों से महंगे रेडिएशन-हार्डन (Radiation-Hardened) चिप्स आयात करने पड़ते थे, लेकिन ‘IRIS’ के आने से भारत इस क्षेत्र में पूरी तरह आत्मनिर्भर होने जा रहा है।
9. DRDO का ULPGM-V3 और NASM-SR मिसाइल टेस्ट सफल
भारतीय सेनाओं की मारक क्षमता को डिजिटल और आधुनिक रूप देने के लिए DRDO ने दो बड़े मिसाइल परीक्षण किए हैं। पहला परीक्षण ULPGM-V3 (Unmanned Aerial Vehicle Launched Precision Guided Missile) का रहा, जिसे ड्रोन्स से दागकर सटीक निशाना लगाया जा सकता है। दूसरा परीक्षण NASM-SR (Naval Anti-Ship Missile – Short Range) का रहा, जो भारतीय नौसेना के हेलीकॉप्टरों से दुश्मन के युद्धपोतों को तबाह करने की क्षमता रखती है। दोनों परीक्षणों ने अपने सभी तकनीकी मानकों को पूरा किया।
10. स्पेस टेक (Space Tech) स्टार्टअप्स में अभूतपूर्व बूम
भारत का निजी अंतरिक्ष क्षेत्र (Private Space Sector) अब वैश्विक स्तर पर एक स्थापित प्लेयर बन चुका है। पिक्सल (Pixxel), स्काईरूट (Skyroot) और अग्निकुल (Agnikul) जैसे भारतीय स्पेस-टेक स्टार्टअप्स को इस छमाही में रिकॉर्ड विदेशी और घरेलू फंडिंग प्राप्त हुई है। ये स्टार्टअप्स न केवल उपग्रहों के छोटे समूह (Constellations) लॉन्च कर रहे हैं, बल्कि वैश्विक ग्राहकों के लिए ऑन-डिमांड लॉन्चिंग की सुविधाएं भी विकसित कर रहे हैं।
11. DRDO को मिला प्रतिष्ठित ‘Public Service Award’
प्रतिष्ठित IBLA 2026 (CNBC-TV18 India Business Leader Awards) समारोह में रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) को ‘Outstanding Contribution to Public Service Award’ से सम्मानित किया गया। यह पुरस्कार रक्षा प्रौद्योगिकियों के विकास के साथ-साथ क्रिटिकल मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर, रडार सिस्टम और नागरिक सुरक्षा में DRDO के निरंतर योगदान के लिए दिया गया।
💻 3. सेमीकंडक्टर, क्वांटम और एआई (Semiconductor, Quantum & AI)
12. भारत सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) 2.0 की शुरुआत
केंद्र सरकार ने अपने चिप-निर्माण अभियान को अगले स्तर पर ले जाते हुए Semiconductor Mission 2.0 को हरी झंडी दे दी है। इसके तहत देश में नई एटीएमपी (ATMP – Assembly, Testing, Marking, and Packaging) यूनिट्स और कमर्शियल फैब्स (Fabs) की स्थापना के लिए वित्तीय प्रोत्साहन को और सरल बनाया गया है। इस वित्तीय वर्ष के शुरुआती महीनों में ही सेमीकंडक्टर डिजाइन क्षेत्र में काम करने वाले घरेलू स्टार्टअप्स के भीतर $92 मिलियन (92 मिलियन डॉलर) से अधिक का निवेश दर्ज किया गया है।
13. National Quantum Mission (NQM) में आई तेज प्रगति
भारत के राष्ट्रीय क्वांटम मिशन के तहत देश के प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों जैसे IIT बॉम्बे, IIT दिल्ली और IISc बेंगलुरु में उन्नत क्वांटम प्रयोगशालाओं (Quantum Labs) का नेटवर्क स्थापित किया जा चुका है। शोधकर्ता इस समय क्वांटम कंप्यूटिंग (8-क्विबिट से ऊपर), सुपर-सिक्योर क्वांटम की डिस्ट्रीब्यूशन (QKD) कम्युनिकेशन लाइन्स और क्वांटम सेंसर्स के स्वदेशी विकास पर दिन-रात काम कर रहे हैं।
14. गूगल (Google) का विशाखापत्तनम में $15 बिलियन का AI Hub प्लान
वैश्विक टेक दिग्गज गूगल ने भारत की आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस क्षमता पर भरोसा जताते हुए आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में $15 बिलियन (15 अरब डॉलर) के भारी-भरकम निवेश से एक विशाल ‘AI Hub और डेटा सेंटर’ स्थापित करने की घोषणा की है। यह हब पूरे दक्षिण एशिया के लिए गूगल के उन्नत AI मॉडल्स और क्लाउड कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को सपोर्ट करेगा।
15. सर्वम एआई (Sarvam AI) और स्वदेशी AI मॉडल्स का उदय
भारत के भाषाई और सांस्कृतिक परिवेश को समझने के लिए ‘सर्वम एआई’ (Sarvam AI) और ‘क्रूत्रिम’ (Krutrim) जैसे भारतीय स्टार्टअप्स ने विशुद्ध रूप से स्वदेशी बड़े भाषाई मॉडल (LLM) विकसित किए हैं। ये मॉडल भारत की 22 आधिकारिक भाषाओं में न केवल सटीक अनुवाद कर सकते हैं, बल्कि स्थानीय व्यवसायों, कृषि विज्ञान और बैंकिंग प्रणालियों के लिए वॉयस-बेस्ड एआई समाधान भी प्रदान कर रहे हैं।
16. डिजिटल संप्रभुता की दिशा में कदम: स्वदेशी 64-बिट माइक्रोप्रोसेसर तैयार
भारत ने पूरी तरह से देश में डिजाइन और निर्मित पहला कमर्शियल 64-बिट माइक्रोप्रोसेसर तैयार कर लिया है। RISC-V ओपन-सोर्स आर्किटेक्चर पर आधारित यह प्रोसेसर घरेलू स्तर पर बनने वाले सर्विलांस कैमरों, स्मार्ट राउटर्स, ईवी कंट्रोलर्स और सुरक्षित सरकारी कंप्यूटिंग प्रणालियों में इस्तेमाल किया जाएगा, जिससे विदेशी चिप्स पर निर्भरता और डेटा चोरी का खतरा खत्म हो जाएगा।
17. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा संचालित ड्रग डिस्कवरी (AI-Driven Drug Discovery)
भारतीय फार्मास्यूटिकल्स और बायोटेक कंपनियों ने दवाओं के अनुसंधान में लगने वाले समय को कम करने के लिए एआई सुपरकंप्यूटिंग का सहारा लेना शुरू कर दिया है। एआई एल्गोरिदम की मदद से नए रासायनिक यौगिकों (Compounds) की खोज और उनके आणविक व्यवहार (Molecular Behavior) का विश्लेषण अब हफ्तों के बजाय चंद घंटों में किया जा रहा है, जिससे कैंसर और दुर्लभ बीमारियों की जेनेरिक दवाएं तेजी से बनाई जा सकेंगी।
🔬 4. प्रमुख संस्थानों की उपलब्धियां (Academic & Institutional Breakthroughs)
18. IISc Bengaluru ने जीता ‘IEEE TCSC SCALE Challenge 2026’
भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc) बेंगलुरु के शोधकर्ताओं की एक टीम ने प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय IEEE TCSC SCALE Challenge 2026 का खिताब अपने नाम किया है। उन्होंने ‘सिटी-स्केल रीयल-टाइम ट्रैफिक एनालिटिक्स’ के लिए एक उन्नत कंप्यूटिंग फ्रेमवर्क का प्रदर्शन किया, जो एआई और क्लाउड की मदद से बड़े शहरों के ट्रैफिक को बिना मानवीय हस्तक्षेप के सुचारू रूप से संचालित कर सकता है।
19. जटिल रसायनों के विश्लेषण के लिए ‘ChemXDyn’ फ्रेमवर्क विकसित
IISc बेंगलुरु के सामग्री अनुसंधान केंद्र ने ‘ChemXDyn’ नामक एक अत्याधुनिक कम्प्यूटेशनल फ्रेमवर्क का विकास किया है। यह फ्रेमवर्क रासायनिक प्रतिक्रियाओं की गतिकी (Chemical Reaction Dynamics) को परमाणु स्तर पर लाइव सिम्युलेट कर सकता है। इसकी मदद से नई बैटरियों और पॉलीमीर्स के निर्माण में लगने वाला समय आधा रह जाएगा। इसके साथ ही संस्थान के संकाय सदस्यों को देश के प्रतिष्ठित ‘Dr. APJ Abdul Kalam HPC & AI Awards’ से भी नवाजा गया है।
20. नेचर इंडेक्स (Nature Index) में भारतीय संस्थानों की रैंकिंग में भारी सुधार
प्रतिष्ठित वैश्विक वैज्ञानिक जर्नल ‘नेचर’ द्वारा जारी वर्ष 2026 के सूचकांक (Nature Index) में भारतीय अनुसंधान संस्थानों की वैश्विक रैंकिंग में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया है। भौतिक और रासायनिक विज्ञान के क्षेत्र में उच्च गुणवत्ता वाले शोध पत्रों के प्रकाशन के मामले में IISc बेंगलुरु ने भारत में शीर्ष स्थान बरकरार रखा है, जबकि सात प्रमुख IITs और IISERs ने वैश्विक टॉप 100 में अपनी जगह मजबूत की है।
21. Research Science Initiative (RSI) India 2026 का आगाज
मेधावी स्कूली छात्रों में कम उम्र से ही वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने के लिए IISc बेंगलुरु में 6-सप्ताह के गहन RSI India 2026 कार्यक्रम की शुरुआत की गई है। इस कार्यक्रम के लिए देश भर से सबसे मेधावी 32 छात्रों का चयन किया गया है, जिन्हें सीधे भारत के चोटी के वैज्ञानिकों के संरक्षण में लाइव प्रयोगशालाओं में शोध करने का अवसर मिल रहा है।
🌿 5. क्लीन टेक, बायोटेक और ग्लोबल आउटरीच (Clean-Tech & Global Reach)
22. CSIR की डीप-टेक क्रांति: ‘रेड मड’ को कैटेलिस्ट में बदला
वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR) की प्रयोगशालाओं ने पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक अभूतपूर्व खोज की है। एल्युमिनियम उद्योग से निकलने वाले खतरनाक कचरे ‘रेड मड’ (Red Mud) को शोधकर्ताओं ने एक उच्च-मूल्य वाले औद्योगिक कैटेलिस्ट (Catalyst) में बदलने की तकनीक विकसित की है। यह कैटेलिस्ट रिफाइनरियों से निकलने वाली हानिकारक गैसों को शुद्ध करने में काम आएगा। CSIR ने अपनी इस नई तकनीकी क्षमता को दर्शाने वाली आधिकारिक ‘CSIR प्रोफाइल रिपोर्ट’ भी जारी की है।
23. भारत इनोवेट्स 2026 (Bharat Innovates – Nice, France)
वैश्विक मंच पर भारतीय नवाचार का डंका बजाने के लिए भारत के 120 से अधिक डीप-टेक स्टार्टअप्स का एक बड़ा दल फ्रांस के नीस (Nice) शहर में आयोजित होने वाले वैश्विक तकनीकी सम्मेलन में भाग लेने रवाना हो रहा है। यह दल वहाँ यूरोपीय निवेशकों और वैश्विक कंपनियों के साथ एआई, सेमीकंडक्टर, स्पेसटेक और एडवांस्ड बायोटेक के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय साझेदारी और पेटेंट लाइसेंसिंग पर समझौतों को अंतिम रूप देगा।
24. बायोफार्मा और उच्च-सुरक्षा वाली BSL-4 लैब्स का देशव्यापी विस्तार
भविष्य की महामारियों से देश को सुरक्षित रखने और जैव-सुरक्षा (Biosecurity) को सुदृढ़ करने के लिए जैव प्रौद्योगिकी विभाग (DBT) ने देश में तीन नई Biosafety Level 4 (BSL-4) प्रयोगशालाओं के निर्माण को मंजूरी दे दी है। ये लैब्स अत्यधिक संक्रामक वायरसों पर शोध करने और उनके खिलाफ तत्काल स्वदेशी वैक्सीन और मोनोक्लोनल एंटीबॉडीज (Monoclonal Antibodies) तैयार करने का काम करेंगी।
25. ग्रीन हाइड्रोजन और ‘DST-CCUS Roadmap’ का क्रियान्वयन
जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) ने अपनी कार्बन कैप्चर, यूटिलाइजेशन एंड स्टोरेज (CCUS) नीति का आधिकारिक रोडमैप जारी कर दिया है। इसके साथ ही, भारत के राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन के तहत भारी उद्योगों (जैसे स्टील और फर्टिलाइज़र प्लांट्स) में कोयले और प्राकृतिक गैस को हटाकर शत-प्रतिशत स्वदेशी ग्रीन हाइड्रोजन इलेक्ट्रोलाइजर्स को स्थापित करने के पायलट प्रोजेक्ट्स व्यावसायिक रूप से शुरू हो गए हैं।
📅 आगामी बड़ा कार्यक्रम: ‘बेंगलुरु टेक समिट 2026’ की तैयारियां तेज
विज्ञान और प्रौद्योगिकी के इस महाकुंभ को और आगे बढ़ाने के लिए एशिया के सबसे बड़े तकनीकी सम्मेलनों में से एक Bengaluru Tech Summit 2026 की रूपरेखा तैयार कर ली गई है। नवंबर 2026 में आयोजित होने वाले इस इवेंट में दुनिया भर के नीति निर्माता, नोबेल पुरस्कार विजेता और टेक लीडर्स भारत के इस बदलते R&D इकोसिस्टम का हिस्सा बनने के लिए बेंगलुरु में जुटेंगे।
