विशेष रिपोर्ट/- उत्तराखंड की राजनीतिक सरगर्मी के बीच अल्मोड़ा जिले की महत्वपूर्ण द्वाराहाट विधानसभा सीट पर भारतीय जनता पार्टी के युवा और ऊर्जावान नेता अनिल सिंह शाही की स्थिति बेहद मजबूत नजर आ रही है। क्षेत्र में उन्हें लगातार व्यापक और बढ़ता हुआ जनसमर्थन मिल रहा है। स्थानीय कार्यकर्ताओं, ग्राम प्रधानों, महिला मोर्चा, युवाओं और आम जनता के बीच उनकी सक्रियता और जनसेवा के कार्यों की सराहना हो रही है, जिससे इस बार उनके समर्थकों का जीत को लेकर आत्मविश्वास काफी बढ़ा हुआ है।

पिछले चुनाव का करीबी मुकाबला और भीतरघात का दर्द
वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव परिणामों पर नजर डालें तो द्वाराहाट सीट पर मुकाबला बेहद रोमांचक और कांटे का रहा था।
- कड़ी टक्कर: भाजपा के टिकट पर मैदान में उतरे अनिल शाही ने जबरदस्त चुनौती पेश करते हुए 17,584 वोट हासिल किए थे।
- कम अंतर की हार: कांग्रेस प्रत्याशी मदन सिंह बिष्ट को 17,766 वोट मिले थे, और अनिल शाही मात्र 82 वोटों के बेहद मामूली अंतर से चुनाव हार गए थे।
- भीतरघात की चर्चा: स्थानीय कार्यकर्ताओं और पार्टी समर्थकों का मानना है कि पिछले चुनाव में उस हार के पीछे कुछ अंदरूनी भीतरघात और कुछ नकारात्मक तत्वों की भूमिका रही थी, जिसने चुनावी नतीजों को प्रभावित किया था।
इन मुद्दों पर फोकस और मजबूत होती रणनीति
इस बार अनिल शाही पूरी तरह संगठित, आश्वस्त और आत्मविश्वास से ओत-प्रोत नजर आ रहे हैं। क्षेत्र में उनकी सक्रियता ने राजनीतिक समीकरणों को गर्मा दिया है: - ग्राम स्तर पर जनसंपर्क: गांव-गांव बैठकें, जनसंपर्क अभियानों और युवाओं की सक्रिय भागीदारी से उनकी उम्मीदवारी को जमीनी स्तर पर मजबूती मिल रही है।
- वास्तविक मुद्दों की समझ: समर्थकों का कहना है कि अनिल शाही क्षेत्र की बुनियादी समस्याओं—जैसे विकास कार्यों का अभाव, बुनियादी सुविधाएं, रोजगार के अवसर और पहाड़ी क्षेत्रों की सबसे बड़ी समस्या पलायन—को बेहद गहराई से समझते हैं।
- जनता का भरोसा: जनता का मानना है कि इस बार वे विकास और जन समस्याओं के पुख्ता एजेंडे के साथ पूरी मजबूती से मैदान में डटे हैं, जिससे विपक्ष की चिंताएं भी बढ़ गई हैं।
क्षेत्र में लगातार बढ़ रहे जनसमर्थन और मजबूत होते संगठनात्मक ताने-बाने के बीच अनिल शाही का यह राजनीतिक उभार द्वाराहाट विधानसभा चुनाव को बेहद दिलचस्प बनाता जा रहा है। वो सरकार से बाहर रहते हुवे भी लगातार क्षेत्र में बड़ी योजनाएं स्वीकृत करा रहे हैं इसलिए उनका जनसमर्थन और भरोसा लगातार बढ़ता दिख रहा है।
